नई दिल्ली | मंगलवार, 11 अगस्त 2026
भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान और गरिमा की रक्षा के दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) कानून, 2026’ (Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Act, 2026) को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मुहर लगते ही यह विधेयक अब देश भर में प्रभावी कानून बन चुका है।
इस नए संशोधन के जरिए दशकों पुरानी उस कानूनी विषमता को दूर कर दिया गया है, जिसके तहत राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को तो कानूनी सुरक्षा प्राप्त थी, लेकिन राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के लिए कोई विशेष कानूनी प्रावधान उपलब्ध नहीं था।
नया कानून लागू होने के बाद अब क्या-क्या बदलेगा?
‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) की धारा 3 में संशोधन के बाद अब निम्नलिखित बदलाव प्रभावी हो गए हैं:
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व्यवधान डालना दंडनीय अपराध: किसी भी सार्वजनिक या औपचारिक आयोजन में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को जानबूझकर रोकना या इसके सामूहिक गायन में किसी भी प्रकार की बाधा पहुंचाना अब एक संज्ञेय अपराध होगा।
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सजा और जुर्माने का प्रावधान: राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा डालने पर आरोपी को 3 वर्ष तक की जेल, जुर्माना अथवा दोनों की सजा हो सकती है। दूसरी बार या बार-बार यह अपराध दोहराने पर कम से कम 1 वर्ष की अनिवार्य कारावास की सजा का प्रावधान है।
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राष्ट्रगान के समकक्ष दर्जा: यह नया कानून राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को कानूनी संरक्षण के मामले में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बिल्कुल समकक्ष लाकर खड़ा करता है।
24 जनवरी 1950 का संकल्प हुआ साकार
संविधान सभा के अध्यक्ष और भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की बैठक में स्पष्ट रूप से घोषणा की थी कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक और अद्वितीय भूमिका निभाई है। इसलिए इसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान ही सम्मान और दर्जा प्रदान किया जाना चाहिए।
हालांकि, 1971 के मूल अधिनियम में केवल राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के अपमान को ही कानूनी अपराध के दायरे में रखा गया था। 2026 का यह नया संशोधन डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उसी ऐतिहासिक भावना और राष्ट्रीय गीत के सम्मान को वैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है।
‘वंदे मातरम्’ का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
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रचनाकार एवं उत्पत्ति: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा संस्कृत-बांग्ला में रचित यह गीत पहली बार 1875 में प्रकाशित हुआ था और बाद में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में शामिल किया गया।
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स्वतंत्रता संग्राम का महामंत्र: 1896 के कोलकाता कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे पहली बार गाया था। 1905 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान यह गीत भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों का सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत और राजनीतिक उद्घोष बना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के सार्वजनिक या औपचारिक गायन में जानबूझकर व्यवधान डालने या उसे रोकने की कोशिशों को कानूनन दंडनीय अपराध बनाना है।
Q2: ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करने पर क्या सजा मिल सकती है?
उत्तर: नए कानून के अनुसार, ‘वंदे मातरम्’ के गायन में जानबूझकर बाधा डालने पर अधिकतम 3 वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। बार-बार अपराध करने पर न्यूनतम 1 वर्ष का कारावास भुगतना होगा।
Q3: यह कानून किस मूल अधिनियम में संशोधन करता है?
उत्तर: यह संशोधन ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) की धारा 3 में बदलाव करता है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख सूचनात्मक एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध नवीनतम विधायी जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। कानून से जुड़े विस्तृत और आधिकारिक विवरण के लिए भारत सरकार के राजपत्र (Official Gazette) का अवलोकन करें।
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