नई दिल्ली | मंगलवार, 1 सितंबर 2026
विदेश मंत्रालय (MEA) ने रूसी सेना में भर्ती किए गए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनकी वापसी को लेकर संसद एवं मीडिया के सामने नवीनतम आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, रूसी सेना में भर्ती हुए भारतीय नागरिकों में से अब तक 51 भारतीयों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि भारत सरकार के कूटनीतिक दबाव के बाद 139 भारतीयों को सुरक्षित discharge करवाकर स्वदेश वापस लाया जा चुका है।
फर्जी एजेंटों के जाल में फंसे भारतीय नागरिक
रिपोर्ट्स और पीड़ितों के परिवारों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इनमें से अधिकांश युवाओं को विदेश में नौकरी (जैसे सिक्योरिटी गार्ड, हेल्पर्स या लॉजिस्टिक्स असिस्टेंट) का झांसा देकर रूस बुलाया गया था। मॉस्को पहुंचने के बाद उन्हें धोखे से या अनुबंध (contract) पर हस्ताक्षर करवाकर युद्ध क्षेत्र में अग्रिम पंक्तियों (frontlines) में भेज दिया गया।
भारत सरकार ने इस पूरे मुद्दे को गंभीरता से लिया है और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) सहित विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने फर्जी जॉब रैकेट चलाने वाले एजेंटों के खिलाफ देशभर में कार्रवाई शुरू कर दी है।
भारत सरकार की सख्त कूटनीतिक कार्रवाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रूसी शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठकों के दौरान इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया है। भारत की ओर से स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि:
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तत्काल डिस्चार्ज: रूसी सेना में काम कर रहे सभी भारतीय नागरिकों को बिना किसी शर्त के तुरंत डिस्चार्ज किया जाए।
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भर्ती पर रोक: भविष्य में किसी भी भारतीय नागरिक की रूसी सैन्य बल में भर्ती पर पूरी तरह से रोक लगे।
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शवों की वापसी व मुआवजा: मृतक भारतीयों के पार्थिव शरीर सम्मानजनक तरीके से भारत लाए जाएं और उनके परिवारों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
आंकड़ों पर एक नजर
| विवरण | आंकड़े |
| सेना से डिस्चार्ज कराकर भारत लाए गए नागरिक | 139 |
| युद्ध/विभिन्न कारणों से जान गंवाने वाले भारतीय | 51 |
| सरकारी प्रयास | निरंतर कूटनीतिक वार्ता एवं फर्जी एजेंटों पर कानूनी कार्रवाई |
विदेश मंत्रालय ने भारतीयों को सलाह दी है कि वे विदेश में नौकरी देने वाले अनधिकृत एजेंटों से सतर्क रहें और रूस या किसी अन्य संघर्षग्रस्त क्षेत्र में सैन्य या जोखिम भरी भूमिकाओं के अनुबंध स्वीकार न करें।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q1: रूसी सेना से अब तक कितने भारतीयों को डिस्चार्ज कराया जा चुका है?
उत्तर: विदेश मंत्रालय (MEA) की जानकारी के अनुसार अब तक 139 भारतीय नागरिकों को डिस्चार्ज कराकर सुरक्षित भारत वापस लाया गया है।
Q2: क्या भारतीय नागरिक अपनी इच्छा से युद्ध में शामिल हुए थे?
उत्तर: नहीं, अधिकांश मामलों में युवाओं को हेल्पर्स या अन्य नौकरियों का झांसा देकर रूस बुलाया गया था और बाद में अनुबंधों के तहत जबरन या धोखे से सैन्य प्रशिक्षण और फ्रंटलाइन पर भेज दिया गया।
Q3: विदेश मंत्रालय इस संबंध में क्या कदम उठा रहा है?
उत्तर: MEA रूसी अधिकारियों के साथ मिलकर शेष भारतीयों की तत्काल रिहाई, शवों की स्वदेश वापसी और इस फर्जी भर्ती रैकेट में शामिल एजेंटों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर रहा है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध आधिकारिक बयानों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।
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