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मकर संक्रांति पर क्या दान करें? जानें अपनी राशि के अनुसार शुभ वस्तुएं और खिचड़ी का महत्व

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नई दिल्ली. मकर संक्रांति हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक है। यह पर्व न केवल खगोलीय परिवर्तन का प्रतीक है, बल्कि यह दान, स्नान और सौहार्द का संदेश भी देता है। साल 2026 में भी यह पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

1. मकर संक्रांति की तैयारी

मकर संक्रांति की तैयारी कुछ दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। यह समय स्वच्छता और सकारात्मक ऊर्जा के स्वागत का होता है।

  • घर की सफाई: त्योहार से पहले घर के कोने-कोने की सफाई की जाती है ताकि सकारात्मकता का संचार हो।

  • पकवानों की तैयारी: घरों में तिल और गुड़ के लड्डू, गजक, रेवड़ी और फेनी जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं।

  • पतंगबाजी का उत्साह: गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में पतंगबाजी के लिए मांझा और रंग-बिरंगी पतंगें खरीदी जाती हैं।

  • पवित्र स्नान की व्यवस्था: इस दिन गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान का विशेष महत्व है, इसलिए लोग तीर्थ स्थलों की यात्रा की योजना बनाते हैं।

2. खिचड़ी का महत्व: क्यों कहा जाता है इसे ‘खिचड़ी पर्व’?

उत्तर भारत में मकर संक्रांति को मुख्य रूप से ‘खिचड़ी’ के नाम से जाना जाता है। इस दिन खिचड़ी बनाने, खाने और दान करने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों कारण हैं:

  • धार्मिक कारण: माना जाता है कि खिचड़ी का संबंध भगवान शिव के अवतार बाबा गोरखनाथ से है। उन्होंने ही सबसे पहले चावल, दाल और सब्जियों को मिलाकर पौष्टिक भोजन के रूप में खिचड़ी का प्रचलन शुरू किया था।

  • ग्रहों का संतुलन: खिचड़ी में उपयोग होने वाली वस्तुएं विभिन्न ग्रहों से जुड़ी होती हैं। जैसे:

    • चावल चंद्रमा का प्रतीक है।

    • उड़द की दाल शनि का प्रतीक है।

    • हल्दी बृहस्पति का प्रतीक है।

    • सब्जियां बुध का प्रतीक हैं।

    • घी सूर्य और मंगल से संबंधित है।

      इसलिए, खिचड़ी खाने से सभी ग्रहों का शुभ प्रभाव प्राप्त होता है।

  • स्वास्थ्य लाभ: कड़ाके की ठंड में खिचड़ी सुपाच्य और शरीर को ऊर्जा देने वाला भोजन है।

3. राशि अनुसार दान करने वाली वस्तुओं की सूची

मकर संक्रांति पर अपनी राशि के अनुसार दान करने से कुंडली के दोष दूर होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।

राशि दान करने योग्य वस्तुएं
मेष गुड़, तिल और लाल मसूर की दाल का दान करें।
वृषभ सफेद तिल, मिश्री, चावल और ऊनी कपड़ों का दान शुभ है।
मिथुन मूंग की दाल, हरा चारा (गाय के लिए) और कंबल।
कर्क चावल, चांदी, सफेद तिल और दूध का दान करें।
सिंह तांबा, गेहूं, गुड़ और स्वर्ण (यदि संभव हो)।
कन्या मूंग की दाल, खिचड़ी और गरीब बच्चों को किताबें।
तुला सफेद वस्त्र, चीनी, चावल और घी।
वृश्चिक गुड़, लाल वस्त्र और तिल के लड्डू।
धनु चने की दाल, हल्दी, केसर और पीला अनाज।
मकर काला तिल, कंबल, तेल और लोहे के बर्तन।
कुंभ काला तिल, ऊनी वस्त्र और सरसों का तेल।
मीन चने की दाल, फल, पीला वस्त्र और हल्दी।

4. मकर संक्रांति के अन्य महत्वपूर्ण नियम

  • सूर्य अर्घ्य: इस दिन सूर्य देव को तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर अर्घ्य देना अत्यंत फलदायी होता है।

  • तिल का उपयोग: शास्त्रानुसार इस दिन तिल के पानी से स्नान, तिल का उबटन, तिल का सेवन और तिल का दान “षट-तिला” कर्म कहलाता है जो पापों का नाश करता है।

  • गाय की सेवा: इस दिन गौशाला में चारा दान करना और गाय की पूजा करना विशेष पुण्य देता है।

विशेष टिप: मकर संक्रांति के दिन ‘ॐ घृणि सूर्याय नम:’ मंत्र का जाप करने से मान-सम्मान और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।

नोट : यह एक सामान्य जानकारी है. 

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