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राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र में बड़ा बदलाव: लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई बने NSCS के नए मिलिट्री एडवाइजर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

नई दिल्ली । शनिवार, 13 जून 2026

भारत सरकार ने देश के रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। भारतीय सेना के डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) का नया मिलिट्री एडवाइजर (सैन्य सलाहकार) नियुक्त किया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के नेतृत्व में काम करने वाले इस शीर्ष संस्थान में यह नियुक्ति कई मायनों में बेहद खास और रणनीतिक है।

क्यों ऐतिहासिक है यह नियुक्ति?

इस नियुक्ति से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण और हालिया अपडेट्स इस प्रकार हैं, जो देश के सुरक्षा तंत्र में आ रहे बदलावों को स्पष्ट करती हैं:

  • पहले सेवारत अधिकारी: राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी सेवारत (Serving) थ्री-स्टार सैन्य अधिकारी को सीधे इस जिम्मेदारी पर तैनात किया गया है। वर्ष 2018 में इस पद को दोबारा सक्रिय किए जाने के बाद से अब तक केवल सेवानिवृत्त या अपनी सेवा के बिल्कुल अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके वरिष्ठ अधिकारियों को ही यह भूमिका दी जाती रही है।

  • लंबा कार्यकाल और जमीनी अनुभव: लेफ्टिनेंट जनरल घई का सैन्य कार्यकाल दिसंबर 2027 तक है। यानी अगले 15 महीनों से अधिक समय तक वे ऑन-ड्यूटी रहते हुए अपने हालिया जमीनी व रणनीतिक अनुभवों का सीधा लाभ देश की सुरक्षा नीतियों को दे सकेंगे।

  • शीर्ष नेतृत्व में बदलाव का क्रम: वह इस पद पर जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि का स्थान ले रहे हैं, जिन्हें हाल ही में 31 मई 2026 को देश का नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किया गया है। उनसे पहले वर्तमान सीडीएस जनरल अनिल चौहान और एयर मार्शल संदीप सिंह भी इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन कर चुके हैं।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के रणनीतिकार: जब कांप उठा था पाकिस्तान

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई का नाम भारतीय सैन्य इतिहास के उन पन्नों में दर्ज है, जिसने पड़ोसी देश की रातों की नींद उड़ा दी थी। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से जवाबी कार्रवाई के रूप में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया गया था।

उस समय डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के रूप में राजीव घई ही भारतीय सेना के सभी सैन्य अभियानों की निगरानी और संचालन कर रहे थे। भारतीय वायु सेना और नौसेना के साथ मिलकर उन्होंने एक ऐसा अचूक चक्रव्यूह रचा कि पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों के साथ-साथ वहां के प्रमुख एयरबेस को भी नेस्तनाबूद कर दिया गया। भारतीय शूरवीरों के इस प्रचंड प्रहार से घबराकर अंततः पाकिस्तान को शांति की गुहार लगानी पड़ी। इसके बाद राजीव घई ने ही पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों से सीधे बात की और अत्यंत कड़े रुख के साथ भारत की शर्तों पर सीजफायर (संघर्ष विराम) को मंजूरी दी थी।

चीन और पाकिस्तान मामलों के इन-डेप्थ एक्सपर्ट

कुमाऊं रेजिमेंट से 16 दिसंबर 1989 को सैन्य जीवन की शुरुआत करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई का करियर पारंपरिक युद्ध पद्धतियों, आतंकवाद-विरोधी अभियानों और हाई-अल्टीट्यूड (उच्च पर्वतीय) वॉरफेयर के व्यापक अनुभवों से भरा हुआ है।

सैन्य कमान / क्षेत्रनिभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका
पश्चिमी सेक्टरइन्फैंट्री बटालियन की कुशलतापूर्वक कमान संभाली
मध्य क्षेत्रस्वतंत्र ब्रिगेड का बेहतरीन नेतृत्व किया
अरुणाचल प्रदेशएलएसी (LAC) के पास स्थित 56वीं इन्फैंट्री डिवीजन के GOC रहे
श्रीनगर (कश्मीर)रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील 15 कोर (चिनार कॉर्प्स) का नेतृत्व किया

अरुणाचल प्रदेश में चीनी सीमाओं की सुरक्षा से लेकर श्रीनगर में घाटी और एलओसी (LoC) के पास आतंकवाद-रोधी अभियानों को लीड करने के कारण उन्हें चीन और पाकिस्तान, दोनों ही मोर्चों का सबसे बड़ा रणनीतिक विशेषज्ञ माना जाता है। उनके इस अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें ‘उत्तम युद्ध सेवा पदक’ (UYSM), ‘अति विशिष्ट सेवा पदक’ (AVSM) और ‘सेना पदक’ (SM) से भी नवाजा जा चुका है।

जटिल क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और थिएटर कमांड जैसे बड़े सैन्य सुधारों के इस दौर में, अजीत डोभाल की टीम में एक सक्रिय व अनुभवी जनरल का शामिल होना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों को और अधिक आक्रामक और व्यावहारिक धार देगा।

यह वीडियो लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई के सैन्य सफर, विशेष रूप से भारत-पाकिस्तान तनाव के समय डीजीएमओ (DGMO) के रूप में निभाई गई उनकी महत्वपूर्ण भूमिका और सीजफायर की पूरी इनसाइड स्टोरी को विस्तार से समझने में मदद करता है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।