लखनऊ. उत्तर-पश्चिम भारत इस समय भीषण ठंड और घने कोहरे की चपेट में है। इस शीतलहर का सबसे गहरा प्रभाव उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र कानपुर पर देखने को मिल रहा है। ‘ठिठुरन’ और ‘शून्य दृश्यता’ (Zero Visibility) ने न केवल जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि स्वास्थ्य और परिवहन के लिए भी बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
1. कानपुर में भीषण ठंड का मुख्य कारण
कानपुर की भौगोलिक स्थिति गंगा के मैदानी इलाकों में है। वर्तमान में यहाँ पड़ रही कड़ाके की ठंड के पीछे तीन प्रमुख कारक हैं:
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पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance): हिमालयी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी के बाद वहां से आने वाली बर्फीली उत्तर-पश्चिमी हवाएं सीधे कानपुर के मैदानी क्षेत्रों में पहुंच रही हैं।
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कोहरे की चादर: आसमान में छाई घने कोहरे की परत सूर्य की किरणों को धरती तक पहुंचने से रोक रही है, जिसे ‘डे-कोल्ड’ (Day Cold) की स्थिति कहा जाता है। इससे दिन का तापमान सामान्य से 5-8 डिग्री सेल्सियस नीचे गिर जाता है।
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नमी का स्तर: गंगा नदी के समीप होने के कारण हवा में नमी अधिक रहती है, जो ठंड के अहसास को और अधिक बढ़ा देती है।
2. कोहरे का कहर और दृश्यता (Visibility)
कानपुर में कोहरा इस कदर प्रभावी है कि सुबह के समय दृश्यता अक्सर 0 से 50 मीटर के बीच रह जाती है।
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परिवहन पर असर: दृश्यता कम होने के कारण कानपुर के चकेरी एयरपोर्ट से उड़ानें प्रभावित हो रही हैं और ‘शताब्दी’ व ‘राजधानी’ जैसी प्रमुख ट्रेनें घंटों की देरी से चल रही हैं।
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सड़क दुर्घटनाएं: नेशनल हाईवे (NH-2/NH-19) पर कोहरे के कारण यातायात अत्यंत धीमा हो गया है। प्रशासन ने चालकों को फॉग लाइट का उपयोग करने और गति सीमित रखने की सख्त चेतावनी दी है।
3. तापमान का विश्लेषण
पिछले कुछ दिनों में कानपुर के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है:
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न्यूनतम तापमान: रात का पारा 3°C से 6°C के बीच झूल रहा है।
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अधिकतम तापमान: धूप न निकलने के कारण दिन का तापमान 12°C से 15°C के बीच बना हुआ है।
| स्थिति | औसत तापमान (वर्तमान) | सामान्य से अंतर |
| दिन (Maximum) | 14°C | -7°C |
| रात (Minimum) | 4°C | -4°C |
4. जनजीवन और स्वास्थ्य पर प्रभाव
प्रशासन ने भीषण ठंड को देखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव किया है और कई स्थानों पर अलाव (Bonfire) की व्यवस्था की गई है।
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स्वास्थ्य संबंधी जोखिम: डॉक्टरों ने हृदय घात (Heart Attack) और ब्रेन स्ट्रोक के प्रति सचेत रहने की सलाह दी है, क्योंकि अत्यधिक ठंड में नसें सिकुड़ जाती हैं और रक्तचाप बढ़ जाता है।
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कृषि पर असर: यह कोहरा गेहूं की फसल के लिए तो लाभदायक है, लेकिन आलू और सरसों की फसल में ‘पाले’ (Frost) का खतरा बढ़ गया है।
मौसम विभाग के अनुसार, कानपुर को अभी अगले कुछ दिनों तक इस ‘कोल्ड डे’ और घने कोहरे से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे:
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सुबह और शाम के समय बाहर निकलने से बचें।
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ऊनी कपड़ों की कई परतें पहनें।
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गाड़ी चलाते समय ‘लो-बीम’ हेडलाइट का प्रयोग करें।
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