कानपुर. उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के बावजूद सरकारी कर्मचारियों द्वारा अवैध वसूली के मामले थम नहीं रहे हैं। ताजा मामला कानपुर के बिधनू क्षेत्र का है, जहाँ एक लेखपाल का रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सदर ने आरोपी लेखपाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
बिधनू क्षेत्र के कठारा गांव में तैनात लेखपाल मानिक लाल गुप्ता का एक वीडियो शुक्रवार शाम को इंटरनेट पर प्रसारित हुआ। वीडियो में लेखपाल एक किसान से सरकारी दस्तावेज (खसरा) तैयार करने के नाम पर रुपयों की मांग कर रहे थे।
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सौदा और वसूली: वीडियो में लेखपाल पहले किसान से 2 हजार रुपये की मांग करते दिख रहे हैं।
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रंगे हाथ पकड़े गए: बातचीत के दौरान किसान उन्हें 500 रुपये थमाता है, जिसे लेखपाल स्वीकार कर लेते हैं। यह पूरी घटना किसी ने मोबाइल में कैद कर ली और सोशल मीडिया पर साझा कर दी।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
वीडियो वायरल होते ही कानपुर सदर के एसडीएम अनुभव सिंह ने मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने प्राथमिक जांच में वीडियो को सही पाते हुए लेखपाल मानिक लाल गुप्ता को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
“भ्रष्टाचार के मामले में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। वायरल वीडियो के आधार पर लेखपाल को सस्पेंड कर दिया गया है और पूरे प्रकरण की जांच तहसीलदार को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी के खिलाफ विभागीय और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
— अनुभव सिंह, एसडीएम (सदर)
ग्रामीणों में आक्रोश
इस घटना के बाद से स्थानीय किसानों और ग्रामीणों में काफी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि खसरा और खतौनी जैसे मूलभूत दस्तावेजों के लिए भी उन्हें तहसील के चक्कर काटने पड़ते हैं और सुविधा शुल्क की मांग की जाती है। फिलहाल, तहसीलदार की जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद लेखपाल पर कानूनी शिकंजा और कस सकता है।
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