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IIT Kanpur में 46 दिनों में तीसरी आत्महत्या: जूनियर टेक्नीशियन अंजू कुमारी ने की खुदकुशी, कैंपस में दहशत

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आईआईटी कानपुर मुख्य द्वार

कानपुर. देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में शुमार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। संस्थान के भीतर पिछले 46 दिनों के भीतर यह तीसरी आत्महत्या है, जिसने कैंपस के सुरक्षा दावों और मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

ताजा घटना: जूनियर टेक्नीशियन ने लगाया फंदा

शनिवार को कैंपस के भीतर 29 वर्षीय महिला जूनियर टेक्नीशियन अंजू कुमारी ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। अंजू मूल रूप से झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले की रहने वाली थीं। सूचना मिलते ही एडीसीपी कपिल देव सिंह और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस को अभी तक कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, हालांकि मृतका के परिजनों को सूचित कर दिया गया है।

46 दिनों का खौफनाक घटनाक्रम

आईआईटी कानपुर में पिछले डेढ़ महीने के भीतर मौतों का एक भयावह सिलसिला शुरू हो गया है:

  1. 14 फरवरी 2026: जूनियर टेक्नीशियन अंजू कुमारी ने आत्महत्या की।

  2. 20 जनवरी 2026: पीएचडी छात्र रामस्वरूप ईशराम (28 वर्ष) ने छठी मंजिल से कूदकर जान दी। वे अपनी पत्नी और दो साल की बच्ची के साथ कैंपस में ही रहते थे।

  3. 29 दिसंबर 2025: बीटेक छात्र जयसिंह मीणा ने फांसी लगाई। बताया जा रहा है कि बैकपेपर और प्लेसमेंट में शामिल न हो पाने के कारण वे भारी तनाव में थे।

दो वर्षों में 10 से अधिक मौतें: एक नजर में

कैंपस के भीतर केवल छात्र ही नहीं, बल्कि शोध सहायक और स्टाफ भी इसका शिकार हो रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति भयावह है:

  • दिसंबर 2023: डॉ. पल्लवी चिल्का (शोध सहायक)

  • जनवरी 2024: विकास मीणा (M.Tech) और प्रियंका जायसवाल (PhD)

  • अक्टूबर 2024: प्रगति (PhD)

  • फरवरी – अक्टूबर 2025: अंकित यादव, दीपक चौधरी और धीरज सैनी

गंभीर चिंता का विषय

विशेषज्ञों का मानना है कि संस्थान में अकादमिक दबाव (Academic Pressure), डिग्री समय पर पूरी न होने का डर और भविष्य की अनिश्चितता छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। जयसिंह मीणा के मामले में ‘बैकपेपर’ के कारण प्लेसमेंट से बाहर होना उनकी आत्महत्या का प्रमुख कारण माना गया था।

पुलिस का बयान: “हम हर पहलू की जांच कर रहे हैं। परिजनों से बात की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। संस्थान के प्रशासन से भी बातचीत की जाएगी ताकि यह समझा जा सके कि बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं।”

मदद के लिए संपर्क करें:

यदि आप या आपका कोई परिचित किसी भी तरह के मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया मदद मांगें। आप टेली-मानस (14416) या स्थानीय हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।

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