नई दिल्ली. पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों के बीच भारत के लिए एक बहुत अच्छी खबर आई है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जिसे दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री रास्ता माना जा रहा है, वहां से भारत के दो विशाल जहाज शिवालिक (Shivalik) और नंदा देवी (Nanda Devi) सुरक्षित बाहर निकल आए हैं। इन जहाजों में करीब 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी (LPG) लदी है, जो जल्द ही आपके रसोई घर तक पहुँचने वाली है।
युद्ध के बीच ‘ऑपरेशन सुरक्षा’ सफल
पिछले कुछ दिनों से ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। भारतीय जहाजों के फंसने से देश में रसोई गैस की किल्लत की खबरें आने लगी थीं। लेकिन भारतीय नौसेना के ‘ऑपरेशन संकल्प’ (Operation Sankalp) और कूटनीतिक प्रयासों के चलते इन जहाजों ने सुरक्षित रास्ता पार कर लिया है।
गुजरात के बंदरगाहों पर कब पहुंचेंगे जहाज?
सरकारी अधिकारियों और शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, दोनों जहाजों का शिड्यूल इस प्रकार है:
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शिवालिक (Shivalik): यह जहाज करीब 46,000 टन से ज्यादा गैस लेकर 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचेगा।
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नंदा देवी (Nanda Devi): इतनी ही मात्रा में गैस लेकर यह जहाज 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पर लंगर डालेगा।
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पैनिक बुकिंग न करें: सरकार ने दिया आश्वासन
गैस आपूर्ति में आई इस बाधा के कारण देश के कई हिस्सों में ‘पैनिक बुकिंग’ (Panic Booking) देखी गई। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, अकेले शुक्रवार को करीब 88.8 लाख सिलेंडर बुक किए गए, जो सामान्य से काफी अधिक है।
विशेषज्ञों का कहना है: “इन दो जहाजों के आने से सप्लाई चेन में आ रहा दबाव कम होगा। सरकार ने ‘अनिवार्य वस्तु अधिनियम’ (Essential Commodities Act) के तहत गैस की जमाखोरी रोकने के कड़े निर्देश दिए हैं।”
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प्रमुख आंकड़े और मौजूदा स्थिति
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फंसे हुए जहाज: फारस की खाड़ी में भारत के कुल 24 जहाज मौजूद थे, जिनमें से अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।
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कुल मात्रा: 92,700 टन गैस से करोड़ों सिलेंडरों की रिफिलिंग की जा सकती है।
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सुरक्षा चक्र: भारतीय नौसेना के विध्वंसक (Destroyers) और P-8I निगरानी विमान अरब सागर में तैनात हैं ताकि ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।
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क्या होगा आम आदमी पर असर?
पिछले हफ्ते पश्चिम एशिया संकट के कारण घरेलू गैस की कीमतों में दबाव देखा गया था और कुछ शहरों में कमर्शियल गैस की किल्लत से रेस्टोरेंट भी प्रभावित हुए थे। इन दो जहाजों के भारत पहुंचने से न केवल सप्लाई स्थिर होगी, बल्कि बाजार में कीमतों के बढ़ने का डर भी कम होगा।
सरकार का अगला कदम:
शिपिंग मंत्रालय अब उन बाकी जहाजों को निकालने की योजना बना रहा है जो अभी भी ओमान की खाड़ी या जलडमरूमध्य के आसपास हैं। अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास पर्याप्त पेट्रोलियम रिजर्व है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।
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