लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए इसे पूरी तरह डिजिटल करने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठकें फाइलों में नहीं, बल्कि ‘मानव संपदा पोर्टल’ पर ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी।
📅 31 मार्च तक डेटा अपडेट करना अनिवार्य
शासन ने सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को सख्त लहजे में कहा है कि इस नई व्यवस्था के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा और डेटा फीडिंग का काम 31 मार्च तक हर हाल में पूरा कर लिया जाए। इस समय सीमा के बाद किसी भी विभाग में ऑफलाइन डीपीसी स्वीकार्य नहीं होगी।
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🛠️ कैसे काम करेगा नया DPC मॉड्यूल?
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) ने पोर्टल पर एक विशेष मॉड्यूल विकसित किया है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
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ऑटो-जेनरेटेड डेटा: कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची (Seniority List), पात्रता सूची और स्कोर कार्ड सिस्टम से स्वतः तैयार होंगे।
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ACR का एकीकरण: जिन कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि (ACR) ऑनलाइन है, वे सीधे ब्रॉडशीट में शामिल हो जाएंगी। पुरानी ऑफलाइन एसीआर को विभाग को स्कैन करके अपलोड करना होगा।
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DPC कोऑर्डिनेटर की नियुक्ति: हर विभाग में एक नोडल अधिकारी नामित होगा जो ‘वरिष्ठता’ या ‘योग्यता’ आधारित चयन का विकल्प चुनकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
गाइडलाइन: कैसे अपडेट करें अपनी ई-सर्विस बुक? स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
💡 कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?
इस डिजिटल पहल से उत्तर प्रदेश के लाखों राज्य कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा:
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भ्रष्टाचार पर लगाम: मानवीय हस्तक्षेप कम होने से ‘पसंदीदा’ लोगों को आगे बढ़ाने या किसी की पदोन्नति रोकने के खेल पर विराम लगेगा।
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समय की बचत: फाइलों के एक मेज से दूसरी मेज तक घूमने में लगने वाले महीनों का समय अब चंद मिनटों में बदल जाएगा।
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त्रुटिरहित सेवा रिकॉर्ड: पोर्टल पर दर्ज डेटा के आधार पर चयन होने से जन्मतिथि, जॉइनिंग डेट या कैडर से जुड़ी गलतियों की संभावना शून्य हो जाएगी।
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पारदर्शिता: कर्मचारी अपनी पदोन्नति की स्थिति और पात्रता को स्वयं ट्रैक कर सकेंगे।
प्रशासनिक निर्णय: मुख्य सचिव एसपी गोयल के सख्त निर्देश, 31 मार्च है आखिरी तारीख
⚠️ सावधानी: डेटा अधूरा तो रुक सकती है पदोन्नति
कार्मिक विभाग के आदेशानुसार, यदि किसी कर्मचारी का पंजीकरण, कैडर विवरण, या विभागीय कार्यवाही का डेटा पोर्टल पर अपडेट नहीं है, तो सिस्टम उसे पदोन्नति के लिए अपात्र घोषित कर सकता है। इसलिए, सभी कर्मचारियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी ई-सर्विस बुक को तुरंत चेक कर लें।
🧐 आगे क्या?
इस कदम के साथ उत्तर प्रदेश सरकार ‘ई-गवर्नेंस’ की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा रही है। आने वाले समय में ट्रांसफर-पोस्टिंग और अन्य महत्वपूर्ण सेवा संबंधी निर्णय भी इसी पोर्टल के माध्यम से सेंट्रलाइज्ड किए जाने की योजना है।
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