कानपुर। शहर की सामाजिक संस्था ‘समाज कल्याण सेवा समिति’ पिछले 17 वर्षों से लावारिस शवों को सम्मानजनक विदाई देने का नेक कार्य कर रही है। शनिवार को संस्था द्वारा मोतीझील स्थित महर्षि बाल्मीकि उपवन में एक विशाल ‘सर्वधर्म प्रार्थना सभा’ और ‘श्रद्धांजलि सभा’ का आयोजन किया गया।
आंकड़ों में सेवा का सफर
संस्था के सचिव धनीराम पैंथर ने बताया कि समिति द्वारा 15 मार्च, 2009 से कानपुर नगर और 10 जनवरी, 2010 से कानपुर देहात में लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाया गया था। उन्होंने भावुक होते हुए साझा किया कि:
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14 मार्च, 2026 तक कुल 16,700 लावारिस शवों का धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया जा चुका है।
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संस्था का उद्देश्य है कि भविष्य में पूरे उत्तर प्रदेश में इस मुहिम को विस्तार दिया जाए ताकि किसी भी लावारिस शव की दुर्गति न हो।
इंसानियत का संदेश
प्रकाशनार्थ जारी पत्र में धनीराम पैंथर ने उन मर्मस्पर्शी कारणों का जिक्र किया जिसने उन्हें इस कार्य के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पहले लावारिस शवों को नदियों में फेंक दिया जाता था, जिससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता था बल्कि मानवीय संवेदनाएं भी आहत होती थीं।
“न कोई लावारिस पैदा हुआ, न कोई लावारिस मरे। इंसान का इंसान से हो भाईचारा—यही संदेश हमारा।”

सर्वधर्म प्रार्थना सभा
मोतीझील में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न धर्मों के लोग और गणमान्य नागरिक शामिल हुए। उपस्थित लोगों ने मोमबत्ती जलाकर और पुष्प अर्पित कर उन मृत आत्माओं को नमन किया जिनका दुनिया में कोई अपना नहीं था।
समाज से सहयोग की अपील
समिति ने समाज के समर्थ लोगों से इस पुनीत कार्य में तन, मन और धन के साथ-साथ अंतिम संस्कार की सामग्री (बांस, पन्नी, कफन, चादर) दान करने या कम से कम ‘कंधा दान’ करने की अपील की है।
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