मुंबई. आज 15 जनवरी, 2026 को देश की सबसे अमीर महानगरपालिका, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के लिए मतदान हो रहा है। लगभग चार साल के लंबे इंतजार और कानूनी अड़चनों के बाद हो रहे ये चुनाव केवल नगर निकाय के चुनाव नहीं, बल्कि मुंबई की राजनीतिक दिशा तय करने वाला एक निर्णायक मोड़ साबित होने वाले हैं। मुंबई की गलियों से लेकर सोशल मीडिया के गलियारों तक, इस बार बीएमसी चुनाव का शोर नागरिक सुविधाओं (सड़क, पानी, कचरा) से कहीं अधिक ‘अस्तित्व’ और ‘पहचान’ के मुद्दों पर केंद्रित है। ₹74,400 करोड़ से अधिक के वार्षिक बजट वाली इस संस्था पर कब्जे के लिए महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच कांटे की टक्कर है।
1. मराठी कार्ड: ठाकरे भाइयों का ‘शक्ति प्रदर्शन’
इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा उद्धव ठाकरे (शिवसेना UBT) और राज ठाकरे (MNS) का एक साथ आना रही है। दशकों तक अलग रहने के बाद, दोनों भाइयों ने ‘मराठी मानुस’ और ‘मराठी गौरव’ के मुद्दे पर हाथ मिलाया है।
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मुद्दा: उनका आरोप है कि भाजपा और केंद्र सरकार मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने या इसके महत्व को कम करने की कोशिश कर रही है।
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रणनीति: ‘मराठी अस्मिता’ को केंद्र में रखकर वे उन 30-35% मराठी मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं, जो पारंपरिक रूप से शिवसेना का आधार रहे हैं।
2. भाजपा और महायुति: ‘वैश्विक शहर’ का विजन
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महायुति मुंबई को एक ‘ग्लोबल सिटी’ के रूप में पेश कर रही है।
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गैर-मराठी मतदाता: मुंबई में लगभग 20-25% उत्तर भारतीय और बड़ी संख्या में गुजराती/राजस्थानी मतदाता हैं। भाजपा ने इन समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत की है।
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काउंटर नैरेटिव: भाजपा का तर्क है कि विकास के लिए पहचान की नहीं, बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। उन्होंने विपक्ष के ‘मराठी कार्ड’ को डर की राजनीति करार दिया है।
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3. सत्ता के समीकरण और कड़ा मुकाबला
चुनाव के आंकड़े और गठबंधन इस बार काफी पेचीदा हैं:
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शिवसेना (UBT) + MNS: इनका गठबंधन सीधे तौर पर मराठी वोटों के ध्रुवीकरण पर टिका है।
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महायुति (BJP + शिंदे सेना): ये विकास और हिंदुत्व के साथ-साथ उत्तर भारतीय और व्यापारिक वर्ग के वोटों पर भरोसा कर रहे हैं।
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त्रिकोणीय संघर्ष: कांग्रेस और अन्य दल भी कई वार्डों में समीकरण बिगाड़ रहे हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
4. असली विरासत की लड़ाई
यह चुनाव एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के लिए यह साबित करने की भी जंग है कि ‘असली शिवसेना’ मुंबईकरों के दिलों में कौन है। 227 सीटों पर हो रहे इस मतदान के नतीजे यह तय करेंगे कि मुंबई के ‘किंग मेकर’ के रूप में ठाकरे परिवार की पकड़ बनी रहेगी या भाजपा पहली बार अपने दम पर बीएमसी की चाबी हासिल करेगी।
मुंबई में आज का मतदान केवल पार्षदों को चुनने के लिए नहीं, बल्कि इस विचार को चुनने के लिए है कि मुंबई किसकी है? क्या यह केवल ‘मराठी मानुस’ की है, या यह उस हर व्यक्ति की है जिसने इसे ‘सपनों का शहर’ बनाया है? 16 जनवरी को आने वाले नतीजे महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति की नींव रखेंगे।
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