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भारतीय अर्थव्यवस्था की ‘सुपरफास्ट’ रफ्तार: क्यों डेलॉयट और वर्ल्ड बैंक हैं भारत पर फिदा?

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मुंबई. डेलॉयट (Deloitte) और वर्ल्ड बैंक (World Bank) की ताजा रिपोर्टों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर मुहर लगा दी है। वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए डेलॉयट इंडिया ने जीडीपी वृद्धि दर 7.5% से 7.8% रहने का अनुमान जताया है, जो भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।भारत की इस निरंतर बढ़त के पीछे कई संरचनात्मक और नीतिगत कारण हैं, जिन्होंने वैश्विक अस्थिरता के बावजूद घरेलू मोर्चे को मजबूत रखा है।

1. मजबूत घरेलू मांग (Resilient Domestic Demand)

भारतीय विकास की कहानी का सबसे बड़ा नायक ‘घरेलू खपत’ है।

  • फेस्टिव डिमांड: डेलॉयट के अनुसार, त्योहारी सीजन के दौरान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खर्च में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है।

  • मिडल क्लास का उदय: बढ़ती आय और करों में कटौती (Tax Exemptions) ने आम आदमी की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को बढ़ाया है।

2. सेवाओं और विनिर्माण का संगम (Services & Manufacturing)

  • सर्विस सेक्टर: आईटी, फिनटेक और डिजिटल सेवाओं में भारत की वैश्विक पकड़ और मजबूत हुई है। सेवाओं का निर्यात अब कुल निर्यात का लगभग 46% हिस्सा है।

  • PLI स्कीम्स: ₹1.97 लाख करोड़ की ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव’ योजनाओं ने स्मार्टफोन, सेमीकंडक्टर और ईवी (EV) जैसे क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को नई ऊंचाई दी है।

3. डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक निवेश

भारत ने सड़क, रेलवे और डिजिटल कनेक्टिविटी (UPI, 5G) पर रिकॉर्ड सार्वजनिक निवेश किया है।

  • वर्ल्ड बैंक का नजरिया: वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट ‘ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स’ में भारत के 7.2% के विकास अनुमान का श्रेय कर सुधारों (GST 2.0) और बुनियादी ढांचे में निवेश को दिया है।

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वैश्विक झटकों से बचाव का कवच

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब बाहरी झटकों को झेलने में पहले से कहीं अधिक सक्षम है:

  • मुद्रास्फीति (Inflation) पर नियंत्रण: स्थिर खाद्य कीमतों और बेहतर मानसून ने महंगाई को काबू में रखा है, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा है।

  • व्यापार विविधीकरण: अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के जवाब में भारत ने यूरोपीय संघ (EU) जैसे बाजारों के साथ रणनीतिक सौदे करके अपने निर्यात को सुरक्षित किया है।

डेलॉयट की यह रिपोर्ट संकेत देती है कि 2025-26 भारत के लिए “लचीलेपन और निर्णायक सुधारों” का वर्ष होगा। सरकार का ध्यान अब टियर-2 और टियर-3 शहरों को नए विकास इंजनों के रूप में विकसित करने पर है, जो भविष्य में समावेशी विकास (Inclusive Growth) को सुनिश्चित करेगा।

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