भोपाल. मध्य प्रदेश के उज्जैन में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर की गई एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी ने बड़े विवाद का रूप ले लिया है। शहर के इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी के बयान के विरोध में हिंदूवादी संगठनों ने मोर्चा खोलते हुए महाकाल थाने में शिकायत दर्ज कराई है और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा सरकारी कार्यक्रमों और शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम के गायन को लेकर कुछ नए दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इन निर्देशों पर प्रतिक्रिया देते हुए इमाम नासिर अली नदवी ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया। उनके इस बयान को राष्ट्र के प्रति अनादर मानते हुए स्थानीय हिंदूवादी संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
शिकायत के मुख्य बिंदु
हिंदूवादी संगठन के पदाधिकारी रितेश माहेश्वरी द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत में निम्नलिखित आरोप लगाए गए हैं:
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सामाजिक सौहार्द को खतरा: शिकायतकर्ता का कहना है कि राष्ट्र गौरव से जुड़े विषयों पर इस तरह की टिप्पणी कर समाज में वैमनस्य और तनाव पैदा करने की कोशिश की गई है।
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पुराना विवाद: पुलिस को बताया गया कि यह पहली बार नहीं है; पिछले वर्ष भी सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर नदवी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
प्रशासनिक रुख
महाकाल थाना पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बयानों की समीक्षा की जा रही है, जिसके बाद कानून के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
पृष्ठभूमि: वंदे मातरम का मुद्दा भारत में लंबे समय से वैचारिक बहस का केंद्र रहा है। जहां एक ओर इसे राष्ट्रभक्ति का प्रतीक माना जाता है, वहीं दूसरी ओर कुछ धार्मिक विद्वान इसके कुछ अंशों को अपनी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत बताते रहे हैं।
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