कानपुर । बुधवार, 15 जुलाई 2026
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के तहत उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। गाँवों में स्थापित किए गए रिसोर्स रिकवरी सेंटर (RRC) अब सिर्फ कचरा इकट्ठा करने या उसके निस्तारण का जरिया नहीं रह गए हैं, बल्कि ये ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का एक बेहतरीन बिजनेस मॉडल बन चुके हैं।
‘वृक्षारोपण महाअभियान-2026’ के शुरू होने से ग्राम पंचायतों में तैयार की जा रही उच्च गुणवत्ता वाली वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) की मांग में भारी उछाल आया है। इस अभियान के तहत जैविक खाद की बिक्री से पंचायतों को अब तक करीब 90 हजार रुपये की सीधी आय हुई है। इस कमाई को सीधे ग्राम पंचायतों के ओन सोर्स रेवेन्यू (OSR) खाते में जमा किया जा रहा है, जिससे गाँव के विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।
इन ग्राम पंचायतों ने पेश की मिसाल, वैज्ञानिक विधि से तैयार हो रही खाद
जनपद कानपुर नगर के पंचायती राज विभाग द्वारा संचालित आरआरसी सेंटर्स पर वैज्ञानिक ढंग से कचरे का प्रबंधन किया जा रहा है। घर-घर से एकत्र किए जाने वाले गीले कचरे को खाद में बदला जा रहा है। इस मुहिम में मुख्य रूप से निम्नलिखित ग्राम पंचायतें बेहतरीन काम कर रही हैं:
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रमईपुर
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रामपुर भीमसेन
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चौबेपुर कलां
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बगदौदी बांगर
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बिल्हौर देहात (उत्तरी)
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पतारा
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मंझावन
इस व्यवस्था से जहाँ एक तरफ गाँवों में पर्यावरण अनुकूल तरीके से अपशिष्ट का निस्तारण हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ कचरा प्रबंधन अब पंचायतों के लिए कमाई का एक परमानेंट सोर्स बन गया है।
15 रुपये प्रति किलो की दर से 6,030 किलोग्राम खाद की बिक्री
जिलाधिकारी के दिशा-निर्देशों पर चल रहे वृक्षारोपण महाअभियान में विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा इस जैविक खाद को हाथों-हाथ खरीदा जा रहा है। आंकड़ों की बात करें तो:
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रमईपुर: 3,150 किलोग्राम
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रामपुर भीमसेन: 1,200 किलोग्राम
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चौबेपुर कलां: 1,030 किलोग्राम
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मंझावन: 650 किलोग्राम
इन सभी पंचायतों को मिलाकर कुल 6,030 किलोग्राम वर्मी कम्पोस्ट की आपूर्ति की गई है। सरकारी विभागों को यह खाद 15 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची गई है।
गाँव के विकास में खर्च होगी कमाई (29 आरक्षित विषय)
जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) मनोज कुमार ने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री से होने वाली आय को पंचायतों के OSR (ओन सोर्स रेवेन्यू) खाते में भेजा जा रहा है। भारतीय संविधान की 11वीं अनुसूची में शामिल 29 आरक्षित विषयों (जैसे प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, और सड़कें) से संबंधित स्थानीय विकास कार्यों पर पंचायतें अब बिना किसी बाहरी वित्तीय निर्भरता के सीधे अपने स्तर से बजट खर्च कर सकेंगी।
आगामी दिनों में इस खाद की सप्लाई का दायरा और बढ़ाया जाएगा। कानपुर नगर निगम, कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA), और उद्यान विभाग जैसे बड़े सरकारी संस्थान भी अब इस वर्मी कम्पोस्ट को खरीदने की तैयारी में हैं।
जैविक खेती और पर्यावरण को मिलेगा बढ़ावा
कृषि और पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन और उसकी मार्केटिंग का यह मॉडल इसी तरह आगे बढ़ता रहा, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बदल देगा। इससे रासायनिक खादों (जैसे यूरिया और डीएपी) पर किसानों की निर्भरता कम होगी, भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और देश में जैविक खेती (Organic Farming) के आंदोलन को जमीनी मजबूती मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. ग्राम पंचायतों में वर्मी कम्पोस्ट किस मिशन के तहत बनाई जा रही है?
Ans: यह खाद स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के तहत स्थापित रिसोर्स रिकवरी सेंटर्स (RRC) के माध्यम से तैयार की जा रही है।
Q2. कानपुर की पंचायतों ने वर्मी कम्पोस्ट बेचकर कितनी कमाई की है?
Ans: वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के दौरान कुल 6,030 किलोग्राम खाद बेचकर पंचायतों को करीब 90 हजार रुपये की आय हुई है।
Q3. यह वर्मी कम्पोस्ट किस दर (Price) पर बेची जा रही है?
Ans: यह जैविक खाद 15 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से सरकारी विभागों को उपलब्ध कराई जा रही है।
Q4. खाद की बिक्री से होने वाली कमाई कहाँ जमा होती है और इसका क्या उपयोग है?
Ans: यह राशि ग्राम पंचायतों के ओन सोर्स रेवेन्यू (OSR) खाते में जमा होती है, जिसका उपयोग पंचायतें संविधान के 29 आरक्षित विषयों से जुड़े विकास कार्यों में कर सकती हैं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख कानपुर नगर के पंचायती राज विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों और प्रगति रिपोर्ट पर आधारित है। इसका उद्देश्य ग्रामीण विकास और जैविक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
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