बीजिंग. जनवरी 2026 में चीन ने अपनी “डिजिटल ग्रेट वॉल” को और ऊंचा करते हुए अमेरिका और इजरायल की प्रमुख साइबर सुरक्षा कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। बीजिंग का यह कदम वैश्विक ‘टेक वॉर’ (Tech War) में एक नया और गंभीर मोड़ है, जो सीधे तौर पर भारत की तकनीकी नीतियों और साइबर सुरक्षा परिदृश्य को प्रभावित करता है।
🛡️ चीन का डिजिटल बॉर्डर: नई कार्रवाई और कानून
चीन ने 1 जनवरी 2026 से अपने संशोधित साइबर सुरक्षा कानून (CSL) को लागू किया है। इसके तहत, बीजिंग ने घरेलू कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे विदेशी, विशेष रूप से अमेरिकी और इजरायली सुरक्षा सॉफ्टवेयर का उपयोग तुरंत बंद कर दें।
प्रभावित कंपनियां और मुख्य कारण
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निशाने पर कौन: अमेरिका की VMware (Broadcom), Palo Alto Networks, Fortinet, CrowdStrike, और इजरायल की Check Point Software Technologies जैसी दिग्गजों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।
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कारण: चीन का दावा है कि ये सॉफ्टवेयर संवेदनशील डेटा को विदेश भेज सकते हैं, जिससे उनकी ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ को खतरा है।
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सख्त नियम: नए कानून के तहत ‘अघोषित’ या ‘अनसर्टिफाइड’ विदेशी तकनीक का उपयोग करने पर कंपनियों को 10 मिलियन युआन (लगभग $1.4 मिलियन) तक का भारी जुर्माना देना पड़ सकता है।
🌏 ग्लोबल टेक वॉर और भारत पर असर
चीन, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ी इस साइबर जंग का असर दक्षिण एशिया, विशेष रूप से भारत पर गहरा और बहुआयामी है:
1. भारत के लिए अवसर (China Plus One in Tech)
जैसे-जैसे पश्चिमी देशों और चीन के बीच तकनीकी दरार बढ़ रही है, भारत एक “विश्वसनीय डिजिटल साझेदार” (Trusted Digital Partner) के रूप में उभर रहा है।
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ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs): बड़ी टेक कंपनियां (Google, Amazon, Microsoft) अपनी तकनीकी जरूरतों और साइबर सुरक्षा संचालन के लिए भारत में विस्तार कर रही हैं।
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आईटी और सुरक्षा क्षेत्र में नौकरियां: रिपोर्टों के अनुसार, 2026 में भारत में टेक भर्ती में 12-15% की वृद्धि की उम्मीद है, जिसमें साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मांग सबसे अधिक होगी।
2. साइबर सुरक्षा जोखिम और ‘बॉर्डर टेंशन’
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चीनी हार्डवेयर पर निर्भरता: भारत अभी भी कई स्तरों पर चीनी हार्डवेयर घटकों (Chips/Sensors) पर निर्भर है। चीन की ये नई पाबंदियां भारत में सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती हैं।
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प्रतिस्पर्धा: चीनी साइबर सुरक्षा कंपनियों (जैसे Sangfor, 360 Security) का फोकस अब उन बाजारों पर बढ़ेगा जहाँ अमेरिकी प्रभाव कम है, जिससे भारतीय कंपनियों को कड़ी टक्कर मिलेगी।
3. आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल संप्रभुता
चीन की इस कार्रवाई ने भारत को अपनी डिजिटल संप्रभुता (Digital Sovereignty) की दिशा में और तेज कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है:
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स्वदेशी सॉफ्टवेयर: सरकार ‘मेड इन इंडिया’ साइबर सुरक्षा समाधानों को बढ़ावा दे रही है ताकि भविष्य में किसी भी वैश्विक प्रतिबंध या जासूसी के खतरे से बचा जा सके।
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डेटा लोकलाइजेशन: भारत ने भी डेटा सुरक्षा कानूनों को कड़ा किया है ताकि विदेशी फर्मों द्वारा भारतीय नागरिकों का डेटा बाहर ले जाने पर अंकुश लगाया जा सके।
📊 विश्लेषणात्मक निष्कर्ष: भारत को क्या करना चाहिए?
| क्षेत्र | चुनौती | रणनीति |
| सप्लाई चेन | चीनी चिप्स और पार्ट्स पर निर्भरता | सेमीकंडक्टर मिशन के तहत घरेलू उत्पादन को गति देना |
| साइबर सुरक्षा | विदेशी सॉफ्टवेयर पर निर्भरता | निजी और सरकारी क्षेत्र में ‘ज़ीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर’ अपनाना |
| डिप्लोमेसी | टेक-कोल्ड वॉर में संतुलन | अमेरिका और यूरोप के साथ ‘इमर्जिंग टेक्नोलॉजी’ (iCET) समझौतों को मजबूत करना |
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