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सावधान! आपके स्मार्टफोन में छिपा है आतंकी ‘डिजिटल स्लीपर सेल’, गाज़ियाबाद में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

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सोशल मीडिया ऐप्स टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए फैल रहा आतंकी नेटवर्क।

गाज़ियाबाद. भारत की आंतरिक सुरक्षा के सामने एक नई और अदृश्य चुनौती खड़ी हो गई है। सुरक्षा एजेंसियों की ताजा रिपोर्टों ने नींद उड़ा दी है—अब आतंकी संगठन बंद कमरों के बजाय आपके स्मार्टफोन के जरिए युवाओं के दिमाग में जहर घोल रहे हैं। खुफिया सूत्रों की मानें तो पारंपरिक आतंकी नेटवर्क अब ‘डिजिटल स्लीपर सेल’ मॉड्यूल में तब्दील हो चुका है, जो सोशल मीडिया के जरिए सीधे भारतीय युवाओं को निशाना बना रहा है।

1. जैश-ए-मोहम्मद और प्रतिबंधित संगठनों का ‘नया गठजोड़’

जांच एजेंसियों के रडार पर इस समय पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) है। सूत्रों के अनुसार, जैश भारत में अपना आधार मजबूत करने के लिए उन पुराने नेटवर्कों को पुनर्जीवित कर रहा है जो PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) और सिमी (SIMI) के प्रतिबंधित होने के बाद ‘अंडरग्राउंड’ हो गए थे।

  • स्लीपर सेल की सक्रियता: भले ही ये संगठन कागजों पर प्रतिबंधित हैं, लेकिन इनके कट्टरपंथी सदस्य अब ‘लो-प्रोफाइल’ रहकर स्लीपर सेल के रूप में काम कर रहे हैं।

  • रणनीति: इनका मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को उकसाकर उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेलना और समाज में धार्मिक वैमनस्य पैदा करना है।

उत्तर प्रदेश अपराध समाचार

2. टेलीग्राम और इंस्टाग्राम: कट्टरपंथ के नए ‘हॉटस्पॉट’

डिजिटल जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आरोपी अब एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का सहारा ले रहे हैं ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच सकें:

  • व्हाट्सएप का जाल: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 100 से ज्यादा युवाओं को विशेष व्हाट्सएप ग्रुप्स में जोड़ा गया था। इन ग्रुप्स में भड़काऊ वीडियो और ऑडियो संदेश साझा किए जा रहे थे।

  • टेलीग्राम की गोपनीयता: टेलीग्राम पर ऐसे संदिग्ध ग्रुप्स मिले हैं जिनके तार सीधे सीमा पार बैठे हैंडलर्स से जुड़े होने का संदेह है।

  • इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंस: इंस्टाग्राम पर कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने वाले अकाउंट्स के जरिए युवाओं को ‘प्रोपेगेंडा’ परोसा जा रहा था।

3. लोनी हमला और यूट्यूब का ‘रेडिकलाइजेशन’ कनेक्शन

27 मई को लोनी (गाज़ियाबाद) में एक प्रसिद्ध यूट्यूबर पर हुआ जानलेवा हमला महज एक आपराधिक वारदात नहीं थी। पुलिस को संदेह है कि हमलावर ऑनलाइन कट्टरपंथ से प्रभावित थे। जांच एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि क्या हमलावरों को किसी ‘डिजिटल हैंडलर’ ने सोशल मीडिया के जरिए उकसाया था।

4. नाहल क्षेत्र से बड़े नेटवर्क का सुराग

हाल ही में नाहल क्षेत्र से पकड़े गए आरोपियों के पास से बरामद डिजिटल डेटा ने जांच को नई दिशा दी है। ATS (एंटी टेरर स्क्वाड) और केंद्रीय एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि क्या इस नेटवर्क के तार देश के अन्य राज्यों जैसे केरल, महाराष्ट्र और कश्मीर से भी जुड़े हैं।

एजेंसियों का अलर्ट: जांचकर्ताओं का मानना है कि पकड़े गए आरोपी किसी बड़े नेटवर्क का छोटा हिस्सा मात्र हो सकते हैं। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि समाज के प्रभावशाली धार्मिक नेताओं को निशाना बनाकर दंगे भड़काने की एक बड़ी साजिश रची जा रही थी।

गाज़ियाबाद की ताज़ा खबरें

सुरक्षा एजेंसियों की सख्त हिदायत: आप क्या करें?

एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां अब ‘जीरो टॉलरेंस’ मोड में हैं। आम नागरिकों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षा टिप्स:

  1. अपरिचित ग्रुप्स से बचें: किसी भी ऐसे व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप में शामिल न हों जिसे आप नहीं जानते।

  2. भड़काऊ कंटेंट की रिपोर्ट करें: यदि सोशल मीडिया पर कोई भड़काऊ वीडियो या मैसेज दिखे, तो तुरंत साइबर सेल को सूचित करें।

  3. माता-पिता रहें सतर्क: बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों और उनके द्वारा फॉलो किए जा रहे संदिग्ध अकाउंट्स पर नजर रखें।

साइबर सुरक्षा और सतर्कता टिप्स

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