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कानपुर के MSME पर ‘दोहरी मार’: PNG संकट और महंगे कच्चे माल से उत्पादन ठप, हजारों रोजगारों पर संकट

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कानपुर. उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कानपुर की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) इकाइयां इस समय अपने अस्तित्व की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही हैं। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और स्थानीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं ने शहर के औद्योगिक पहिये की रफ्तार धीमी कर दी है। पाइप नेचुरल गैस (PNG) की किल्लत और कच्चे माल की आसमान छूती कीमतों ने उद्यमियों की रातों की नींद उड़ा दी है।

PNG आपूर्ति में 20% की कटौती: बिस्कुट और कन्फेक्शनरी उद्योग पस्त

शहर की बिस्कुट और कन्फेक्शनरी इकाइयों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ऊर्जा संकट बनकर उभरी है। प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत जिन इकाइयों ने भारी निवेश कर PNG आधारित प्लांट लगाए थे, उन्हें अब गैस आपूर्ति में 20% की कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

  • उत्पादन पर असर: गैस कोटा 80% तक सीमित होने के कारण बिस्कुट निर्माताओं ने उत्पादन घटा दिया है।

  • अवकाश में वृद्धि: लागत को संतुलित करने के लिए कई इकाइयों ने सप्ताह में एक के बजाय दो दिन का अवकाश घोषित कर दिया है।

  • अनुमान: जानकारों का मानना है कि यदि अगले 15 दिनों में कोटा बहाल नहीं हुआ, तो बाजार में बड़े ब्रांड्स के उत्पादों की भी किल्लत हो सकती है।

इंडक्शन और कुकिंग अप्लायंसेज में ‘कृत्रिम तेजी’

ईंधन संकट का असर केवल कारखानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर रसोई तक पहुँच रहा है। PNG और एलपीजी की अनिश्चितता के बीच इंडक्शन स्टोव की मांग में अचानक उछाल आया है। निर्माताओं ने मांग को देखते हुए डीलरों को दिए जाने वाले विशेष डिस्काउंट और ऑफर्स वापस ले लिए हैं, जिससे आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ना तय है।

नमकीन उद्योग: कोयला भी हुआ ‘काला सोना’

जो इकाइयां गैस के बजाय कोयले पर निर्भर हैं, उनके लिए भी राह आसान नहीं है। बीते 15 दिनों में कोयले के दाम 15% से 20% तक बढ़ गए हैं।

“गुजरात से उच्च गुणवत्ता वाला कोयला मंगाना अब प्रति टन ₹1200 महंगा पड़ रहा है, जिस पर अतिरिक्त जीएसटी का बोझ भी है।” — स्थानीय उद्यमी।

इस संकट के कारण नमकीन और पैकेट बंद खाद्य पदार्थों के वजन में कटौती (Grammage reduction) या कीमतों में वृद्धि के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

टेक्सटाइल और होजरी: लागत में 30% का भारी उछाल

कानपुर का प्रसिद्ध होजरी और गारमेंट उद्योग, जो हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का जरिया है, कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों के दबाव में है।

  1. केमिकल और डाइज: डाइज और रसायनों की कीमतों में 30% तक की तेजी आई है।

  2. बुकिंग पर ब्रेक: छोटे उद्यमी पुराने रेट पर नए ऑर्डर लेने से बच रहे हैं क्योंकि मौजूदा लागत पर काम करना ‘घाटे का सौदा’ साबित हो रहा है।

क्या है आगे की राह?

उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया और ऊर्जा आपूर्ति सामान्य नहीं की, तो कानपुर के MSME सेक्टर में बड़े पैमाने पर छंटनी और उत्पादन बंदी की नौबत आ सकती है। उद्यमियों की मांग है कि:

  • PNG आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया जाए।

  • कच्चे माल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत कदम उठाए जाएं।

  • MSME इकाइयों के लिए बिजली और गैस की दरों में अस्थायी सब्सिडी दी जाए।

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