नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए ‘मिशन मोड’ में काम शुरू कर दिया है। ईरान में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बेहद जटिल लेकिन सफल कूटनीतिक ऑपरेशन को अंजाम दिया है। पिछले 48 घंटों में 640 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालकर पड़ोसी देशों की सीमाओं तक पहुँचाया गया है।
1. ऑपरेशन का गणित: अर्मेनिया और अजरबैजान बने ‘सुरक्षित कॉरिडोर’
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, निकासी की रणनीति को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया था:
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अर्मेनिया रूट: लगभग 550 भारतीयों को बस और निजी वाहनों के काफिले के जरिए सड़क मार्ग से अर्मेनिया पहुँचाया गया है।
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अजरबैजान रूट: दुर्गम रास्तों और सुरक्षा चुनौतियों के बीच 90 भारतीयों को अजरबैजान की सीमा के पार ले जाया गया।
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विशेष समूह: सुरक्षित निकाले गए लोगों में 284 धार्मिक यात्री भी शामिल हैं, जो ईरान के पवित्र स्थलों की यात्रा पर थे।
विशेष कूटनीतिक जीत: अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच आपसी संबंध ऐतिहासिक रूप से तनावपूर्ण रहे हैं। इसके बावजूद, भारत का दोनों देशों की सीमाओं का उपयोग करना प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ‘संतुलित विदेश नीति’ की एक बड़ी जीत मानी जा रही है।
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2. ईरान में अब भी 9,000 भारतीय: छात्रों पर विशेष ध्यान
ईरान में वर्तमान में लगभग 9,000 भारतीय मौजूद हैं। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के लिए सबसे बड़ी चुनौती संचार व्यवस्था (Communication) का ठप होना और हवाई क्षेत्र (Airspace) पर लगा प्रतिबंध है।
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प्राथमिकता: दूतावास सबसे पहले छात्रों और समुद्री जहाजों पर काम करने वाले क्रू मेंबर्स को प्राथमिकता दे रहा है।
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दूतावास की सक्रियता: युद्ध जैसी स्थिति और जोखिम भरे माहौल के बावजूद भारतीय राजनयिक 24×7 काम कर रहे हैं ताकि परिजनों तक सही जानकारी पहुँच सके।
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3. होर्मुज जलडमरूमध्य: अमेरिका के दबाव के बीच भारत का स्टैंड
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए सैन्य सहयोग की अपील पर भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
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भारत ने साफ किया है कि इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ कोई द्विपक्षीय सैन्य चर्चा नहीं हुई है।
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भारत ने संदेश दिया है कि वह अपनी समुद्री संपदा की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन वह किसी भी सैन्य गुटबाजी के बजाय क्षेत्रीय संवाद और कूटनीति के जरिए तनाव कम करने का पक्षधर है।
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4. ग्लोबल लीडर की भूमिका में भारत
एक ओर जहाँ भारत अपने नागरिकों को सुरक्षित निकाल रहा है, वहीं दूसरी ओर वह क्षेत्र में शांति बहाली के लिए भी सक्रिय है।
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एस. जयशंकर की ‘फोन डिप्लोमेसी’: विदेश मंत्री लगातार संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और अन्य खाड़ी देशों के संपर्क में हैं।
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प्रधानमंत्री का हस्तक्षेप: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) सीधे तौर पर क्षेत्रीय नेताओं के साथ संवाद बनाए हुए है ताकि युद्ध की स्थिति को फैलने से रोका जा सके।
भारतीयों के लिए जारी की गई एडवाइजरी
विदेश मंत्रालय ने ईरान और इजरायल में रह रहे भारतीयों के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं:
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स्थानीय प्रशासन और भारतीय दूतावास के निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।
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बिना आवश्यक कार्य के यात्रा करने से बचें।
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आधिकारिक ‘MADAD’ पोर्टल पर अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें।
निष्कर्ष: भारत का यह रेस्क्यू ऑपरेशन केवल एक बचाव कार्य नहीं है, बल्कि यह दुनिया को भारत की बढ़ती सॉफ्ट पावर और सामरिक सूझबूझ का परिचय दे रहा है।
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