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भारत-नेपाल बॉर्डर पर ₹100 वाले कस्टम नियम पर सुप्रीम कोर्ट का ब्रेक, प्रधानमंत्री बालेन शाह सरकार को बड़ा झटका

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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की तस्वीर और भारत-नेपाल सीमा पर स्थित कस्टम चौकी का दृश्य, जहाँ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चेकिंग में ढील दी गई है।

काठमांडू । शनिवार, 16 मई 2026

भारत और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने सीमा पार से रोजमर्रा का सामान लाने वाले लोगों पर कड़े नियम लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले पर फिलहाल पूरी तरह से रोक लगा दी है। कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद अब आम जनता को बॉर्डर पार करते समय 100 नेपाली रुपये से अधिक के घरेलू सामान पर कोई सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) नहीं देना होगा।

क्या था बालेन शाह सरकार का यह विवादित फैसला?

नेपाल में ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव के बाद, हाल ही में 27 मार्च 2026 को देश के 47वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले बालेन शाह (बालेन्द्र शाह) की सरकार ने राजस्व व्यवस्था को दुरुस्त करने के इरादे से सीमा शुल्क नियमों को बेहद कड़ा कर दिया था। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के नेतृत्व वाली इस नई सरकार के वित्त मंत्रालय ने आदेश जारी किया था कि भारत से नेपाल लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये (भारतीय मुद्रा में करीब 62 रुपये) से अधिक मूल्य के किसी भी सामान पर अनिवार्य रूप से कस्टम ड्यूटी वसूली जाएगी।

इस नियम के लागू होते ही बीरगंज, भैरहवा और रूपनदेही जैसी प्रमुख भारत-नेपाल सीमा चौकियों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। चूंकि सीमावर्ती इलाकों के लाखों नेपाली नागरिक अपनी रोजमर्रा की दाल, चीनी, तेल और सब्जियों जैसी बुनियादी चीजों के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर हैं, इसलिए भंसार (कस्टम) चौकियों पर सख्त चेकिंग के कारण आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों की दलीलें सुन लगाया ‘स्टे ऑर्डर’

सरकार के इस फैसले के खिलाफ नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (रिट) दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि महज 100 रुपये जैसी छोटी राशि के घरेलू सामानों पर सीमा शुल्क वसूलना ‘कस्टम एक्ट 2024’ के मूल प्रावधानों और नागरिक हितों के अनुकूल नहीं है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस हरि प्रसाद फुयाल और जस्टिस टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त बेंच ने विस्तृत सुनवाई की। अदालत ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए अपने अंतरिम आदेश में कहा कि:

“अगले आदेश तक इस विवादित प्रावधान को बिल्कुल भी लागू न किया जाए। अंतिम फैसला आने तक स्थिति पूर्ववत रहेगी और किसी भी आम नागरिक से इस नियम के तहत कोई टैक्स नहीं वसूला जाएगा।”

सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और मंत्रिपरिषद को कड़े निर्देश जारी किए हैं।

राजनीतिक गलियारों में मची हलचल

मात्र 35 वर्ष की उम्र में दुनिया के सबसे युवा शासनाध्यक्षों में शुमार हुए पीएम बालेन शाह के लिए यह अदालती आदेश एक शुरुआती झटका माना जा रहा है। ‘भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’ और कड़े आर्थिक सुधारों का वादा करके सत्ता में आई बालेन सरकार इस नियम के जरिए अवैध व्यापार पर रोक लगाना चाहती थी, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यावहारिक न होने के कारण यह नियम विवादों में घिर गया।

फिलहाल, इस अदालती रोक से सीमा पर रहने वाले सैकड़ों परिवारों ने राहत की सांस ली है और बॉर्डर पर फिर से सामान्य आवाजाही शुरू हो गई है।

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