शुक्रवार, अगस्त 14 2026 | 10:29:22 AM
Breaking News
Home / राष्ट्रीय / सोशल मीडिया पर सेना प्रमुख के नाम से फर्जी दावा: फैक्ट चेक में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का वीडियो निकला झूठा

सोशल मीडिया पर सेना प्रमुख के नाम से फर्जी दावा: फैक्ट चेक में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का वीडियो निकला झूठा

Follow us on:

सोशल मीडिया पर सेना प्रमुख के नाम से वायरल फर्जी वीडियो के पोस्ट का स्क्रीनशॉट

नई दिल्ली | शनिवार, 16 मई 2026

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के नाम से एक बेहद संवेदनशील और सनसनीखेज दावा किया जा रहा है। वायरल पोस्ट और वीडियो में यह बात फैलाई जा रही है कि सेना प्रमुख ने “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर कोई बड़ा आधिकारिक खुलासा किया है।

दावे के मुताबिक, पाकिस्तान द्वारा भारत के प्रमुख व्यापारिक बंदरगाहों (अंबानी और अडानी के पोर्ट्स) पर हमले की आशंका जताए जाने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौसेना को अपनी जवाबी कार्रवाई रोकने के निर्देश दिए थे।

हालाँकि, विभिन्न तथ्य जांच (Fact Check) एजेंसियों और रक्षा विशेषज्ञों की पड़ताल में यह दावा पूरी तरह से मनगढ़ंत, भ्रामक और फर्जी पाया गया है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऐसा कोई भी बयान जारी नहीं किया है।

क्या है वायरल वीडियो की सच्चाई?

तथ्य जांच में यह साफ हो गया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही क्लिप सेना प्रमुख के एक पुराने और मूल वीडियो का संपादित (Edited) संस्करण है। इस वीडियो के कुछ हिस्सों में आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स और डिजिटल एडिटिंग तकनीक (Deepfake) का इस्तेमाल किया गया है।

वीडियो में सेना प्रमुख की आवाज और उनके कथनों को गलत तरीके से तोड़-मरोड़कर जोड़ा गया है ताकि दर्शकों को आसानी से गुमराह किया जा सके और एक गंभीर रणनीतिक विषय पर भ्रम की स्थिति पैदा की जा सके।

वास्तव में क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’?

भले ही इस वीडियो में किया गया दावा फर्जी है, लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का संदर्भ वास्तविक है। भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ चलाए गए इस ऐतिहासिक ऑपरेशन की सफलता को खुद पाकिस्तानी खुफिया दस्तावेजों ने भी स्वीकार किया था। इस अभियान के तहत भारतीय सेना ने सीमा पार जाकर आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया था, जिससे जुड़ी वास्तविक रिपोर्टों को आप इस क्षेत्र की विस्तृत कवरेज में देख सकते हैं।

एआई (AI) और डीपफेक: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती

रक्षा और तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में एआई-आधारित डीपफेक वीडियो और वॉयस क्लोनिंग के मामलों में अप्रत्याशित रूप से तेजी आई है। शरारती तत्वों द्वारा इन तकनीकों का इस्तेमाल विशेष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना और शीर्ष नेतृत्व की छवि को धूमिल करने तथा समाज में असंतोष फैलाने के लिए किया जा रहा है।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी, जिन्होंने जून 2024 में थल सेनाध्यक्ष का पदभार संभाला था, लगातार सेना के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण पर जोर देते रहे हैं।

आम जनता से अपील

इंटरनेट उपयोगकर्ताओं से विशेष अपील :

  • बिना जांचे फॉरवर्ड न करें: सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर आने वाले किसी भी संवेदनशील वीडियो या संदेश को बिना आधिकारिक पुष्टि के आगे साझा न करें।

  • विश्वसनीय स्रोतों का उपयोग करें: राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना से जुड़े मामलों में केवल प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), रक्षा मंत्रालय या आधिकारिक सैन्य प्रवक्ताओं के बयानों पर ही भरोसा करें।

  • सनसनीखेज दावों से सतर्क रहें: यदि कोई खबर अत्यधिक सनसनीखेज या अस्वाभाविक लगती है, तो अधिकांश मामलों में उसके एडिटेड होने की संभावना अधिक होती है।

फैक्ट चेक निष्कर्ष: सोशल मीडिया पर जनरल उपेंद्र द्विवेदी के नाम से “ऑपरेशन सिंदूर” और पोर्ट्स पर हमले को लेकर किया जा रहा दावा पूरी तरह असत्य है। वायरल क्लिप एक एआई-संपादित डीपफेक वीडियो है।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

भारतीय न्यायपालिका में नैतिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI Ethics) और गवर्नेंस का प्रदर्शन

भारत में AI का बढ़ता इस्तेमाल: क्या न्यायपालिका और गवर्नेंस में नैतिक सुरक्षा चक्र तैयार है?

नई दिल्ली । गुरुवार, 13 अगस्त 2026 डिजिटल युग में तकनीक की गति ने हमारे …