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ओडिशा छात्रसंघ चुनाव नतीजे: 8 साल बाद परिसरों में गूंजी सियासत, जानिए एबीवीपी, बीसीजेडी और एनएसयूआई का रिपोर्ट कार्ड

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

भुवनेश्वर|

ओडिशा के उच्च शिक्षण संस्थानों में लगभग आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आखिरकार छात्रसंघ चुनाव संपन्न हुए। इस ऐतिहासिक चुनाव के परिणाम राज्य की छात्र राजनीति के साथ-साथ व्यापक राजनीतिक परिदृश्य के दृष्टिकोण से भी बेहद अहम माने जा रहे हैं।

उपलब्ध अंतिम आंकड़ों के अनुसार, कुल 337 कॉलेजों में से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) समर्थित उम्मीदवारों ने 117 सीटों पर शानदार जीत दर्ज करते हुए खुद को सबसे बड़े संगठन के रूप में स्थापित किया है। वहीं, बीजू जनता दल (BJD) की छात्र इकाई बीजू छात्र जनता दल (BCJD) ने 71 कॉलेजों में सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति कायम रखी है।

 

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चुनावी परिणाम और आंकड़े

संगठन / दलविजयी कॉलेजों की संख्या
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP)117
बीजू छात्र जनता दल (BCJD)71
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI)2
निर्दलीय उम्मीदवार (Independents)16

 

मुख्य विश्वविद्यालयों और परिसरों के परिणाम

  • उत्कल विश्वविद्यालय (Utkal University): भुवनेश्वर स्थित इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में एबीवीपी ने अध्यक्ष और सचिव जैसे शीर्ष पदों पर परचम लहराया।
  • रेवेनशॉ विश्वविद्यालय (Ravenshaw University, Cuttack): कटक के ऐतिहासिक रेवेनशॉ यूनिवर्सिटी में बीसीजेडी के उम्मीदवार ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की।
  • बीजेबी ऑटोनॉमस व राजधानी कॉलेज: राजधानी भुवनेश्वर के बीजेबी कॉलेज और राजधानी कॉलेज में एबीवीपी समर्थित अध्यक्ष प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की।
  • गंगाधर मेहर विश्वविद्यालय (संबलपुर): यहां भी एबीवीपी ने कई महत्वपूर्ण पदों पर सफलता प्राप्त की।
  • रमा देवी महिला विश्वविद्यालय व जाजपुर: रमा देवी महिला विश्वविद्यालय और जाजपुर जिले के कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों में बीसीजेडी का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा।

 

मतदान प्रतिशत और परिसरों में तनाव

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विभिन्न विश्वविद्यालयों में मतदान को लेकर मिला-जुला रुझान देखा गया:

  1. उच्चतम मतदान: मधुसूदन लॉ यूनिवर्सिटी में करीब 79%, उत्कल यूनिवर्सिटी में 69% और मां माणिकेश्वरी यूनिवर्सिटी में लगभग 67% वोट पड़े।
  2. निम्न मतदान: रमा देवी महिला विश्वविद्यालय समेत कुछ अन्य परिसरों में मतदान प्रतिशत 30% या उससे कम दर्ज किया गया।

चुनाव और मतगणना के दौरान कई परिसरों में परिणाम में देरी को लेकर छात्र गुटों के बीच तीखी बहस, झड़पें और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले, जिसके चलते स्थानीय पुलिस व प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।

 

राजनीति पर क्या होगा असर?

आठ साल बाद हुए इन चुनावों से राज्य के छात्र संगठनों को नया नेतृत्व मिला है। कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI को मात्र 2 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जो उसके लिए चिंता का विषय है। वहीं, 16 निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत यह दर्शाती है कि कैंपस चुनावों में दलगत राजनीति के साथ-साथ स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि भी बेहद असरदार होती है।

 

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: ओडिशा में कितने वर्षों के अंतराल के बाद छात्रसंघ चुनाव आयोजित हुए?

उत्तर: ओडिशा में लगभग 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद छात्रसंघ चुनाव आयोजित किए गए हैं।

Q2: छात्रसंघ चुनाव परिणामों में किस संगठन ने सबसे अधिक सीटें जीतीं?

उत्तर: एबीवीपी (ABVP) ने 117 कॉलेजों में जीत दर्ज कर सबसे मजबूत प्रदर्शन किया है।

Q3: उत्कल विश्वविद्यालय में किस संगठन के प्रत्याशी विजयी रहे?

उत्तर: उत्कल विश्वविद्यालय में एबीवीपी समर्थित उम्मीदवारों ने अध्यक्ष और सचिव सहित प्रमुख पदों पर जीत हासिल की।

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख उपलब्ध प्राथमिक रिपोर्टों एवं चुनावी आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है। चुनावी आंकड़ों और अंतिम सूचियों में आधिकारिक अपडेट के अनुसार आंशिक संशोधन हो सकते हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।