देहरादून. देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार में विश्व प्रसिद्ध ‘हर की पैड़ी’ के प्रवेश द्वारों पर लगे नए साइनबोर्ड्स ने एक बार फिर धार्मिक और राजनीतिक बहस छेड़ दी है। इन बोर्ड्स पर स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि “हर की पैड़ी क्षेत्र में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।” इस कदम के बाद जहां हिंदू संगठन इसे मर्यादा की रक्षा बता रहे हैं, वहीं एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
1. क्या है पूरा विवाद?
हरिद्वार के पवित्र घाटों, विशेषकर ‘हर की पैड़ी’ के आसपास श्री गंगा सभा और कुछ स्थानीय हिंदू संगठनों द्वारा चेतावनी वाले बोर्ड लगाए गए हैं।
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बोर्ड का संदेश: इन बोर्ड्स पर लिखा है कि मर्यादा बनाए रखने के लिए गैर-हिंदू इस क्षेत्र में प्रवेश न करें।
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तर्क: श्री गंगा सभा का कहना है कि यह नियम दशकों पुराना है और हरिद्वार नगर पालिका के 1935 के उपनियमों (Bye-laws) का हिस्सा है, जिसे अब केवल सख्ती से लागू किया जा रहा है।
2. ओवैसी की प्रतिक्रिया: “नफरत की राजनीति”
हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा:
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संवैधानिक अधिकार: “क्या यह देश का हिस्सा नहीं है? क्या संविधान किसी को कहीं भी जाने से रोक सकता है?”
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भेदभाव का आरोप: ओवैसी ने इसे नफरत फैलाने वाली राजनीति करार देते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाइयां देश की एकता के खिलाफ हैं।
3. सरकार और प्रशासन का रुख
उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने इस पर संतुलित रुख अपनाया है। सरकार के प्रतिनिधियों का कहना है कि तीर्थ स्थलों की पवित्रता और वहां की प्राचीन परंपराओं का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है। प्रशासन का कहना है कि वे शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी पक्षों से बातचीत कर रहे हैं।
4. स्थानीय संगठनों का दावा
हिंदू रक्षा दल और गंगा सभा के सदस्यों का तर्क है कि ‘हर की पैड़ी’ एक पिकनिक स्पॉट नहीं बल्कि एक पवित्र धार्मिक स्थल है। गैर-धार्मिक गतिविधियों और मर्यादा भंग होने की घटनाओं को रोकने के लिए यह कदम अनिवार्य है।
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