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CM योगी का बड़ा बयान: ‘2014 के बाद शुरू हुआ काशी का असली विकास’, मणिकर्णिका विवाद पर दी सफाई

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी के एक दिवसीय दौरे पर पहुँचे। मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास (Redevelopment) को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री ने सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “स्वतंत्र भारत में काशी जिस सम्मान की हकदार थी, वह उसे 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मिला है।”

1. ‘काशी को बदनाम करने की साजिश’

मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर कार्रवाई और प्राचीन मूर्तियों को नुकसान पहुँचाने के विपक्ष के आरोपों पर सीएम योगी ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा:

  • सफेद झूठ: सोशल मीडिया पर टूटी मूर्तियों की पुरानी तस्वीरें फैलाकर भ्रम पैदा किया जा रहा है।

  • हेरिटेज संरक्षण: विकास के नाम पर कोई मंदिर नहीं तोड़ा गया है। अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति और अन्य ऐतिहासिक स्मारकों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है और उन्हें भव्य रूप में पुनर्स्थापित किया जाएगा।

  • विपक्ष का एजेंडा: कुछ लोग काशी की वैश्विक छवि को धूमिल करना चाहते हैं। जब काशी विश्वनाथ धाम बना था, तब भी इन्हीं लोगों ने साजिश रची थी।

2. 2014 के बाद का ‘कायाकल्प’

सीएम योगी ने तुलनात्मक रूप से बताया कि 2014 से पहले और बाद की काशी में क्या अंतर आया है:

  • सुरक्षा और सफाई: पहले काशी की गलियां तंग और गंदगी से भरी थीं, आज गंगाजल आचमन के लायक है और सड़कें फोरलेन से जुड़ी हैं।

  • अर्थव्यवस्था: काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद पिछले कुछ वर्षों में 25 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था में 1.25 लाख करोड़ रुपये का योगदान हुआ है।

  • बुनियादी ढांचा: नमो घाट (देश का सबसे बड़ा घाट), रोप-वे परियोजना, और कैंसर अस्पताल जैसे संस्थानों ने काशी को ‘स्मार्ट सिटी’ से ऊपर ‘वर्ल्ड क्लास सिटी’ बना दिया है।

3. मणिकर्णिका घाट पर सफाई: ‘अंतिम संस्कार में न हो असुविधा’

मुख्यमंत्री ने मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के प्रोजेक्ट का बचाव करते हुए कहा कि मॉनसून के दौरान शवदाह में आने वाली दिक्कतों (अधजले शव, प्रदूषण और अव्यवस्था) को दूर करने के लिए यह आधुनिकरण जरूरी है। उन्होंने कहा कि “अंतिम संस्कार सनातन धर्म के 16 संस्कारों में से एक है, और यह सम्मानजनक व स्वच्छ वातावरण में होना चाहिए।”

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।