शनिवार, सितंबर 19 2026 | 04:19:32 AM

बरेली: तौकीर रजा के बेटे फरमान की बढ़ी मुश्किलें, FSL रिपोर्ट में ‘स्मैक’ की पुष्टि

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

लखनऊ. बरेली दंगों के मुख्य आरोपी और इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां के बेटे फरमान रजा खां की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया है कि फरमान के पास से बरामद संदिग्ध पाउडर ‘स्मैक’ ही था।

क्या है पूरा मामला?

बीती 6 जनवरी की रात को लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर कछियानी खेड़ा हनुमान मंदिर के पास फरमान रजा की कार एक रोडवेज बस से पीछे से टकरा गई थी। हादसे के बाद जब पुलिस ने मौके पर पहुँचकर फरमान की कार और बैग की तलाशी ली, तो उनके पास से एक पन्नी में क्रिस्टल स्मैक और एक सिरिंज बरामद हुई थी।

जांच रिपोर्ट में खुलासा

पुलिस ने बरामद नशीले पदार्थ को जांच के लिए बरेली स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा था। प्रयोगशाला की रिपोर्ट ने अब पुष्टि कर दी है कि वह पदार्थ स्मैक पाउडर ही था। हालांकि, पुलिस को अभी फरमान के रक्त के नमूनों (Blood Sample) की रिपोर्ट का इंतजार है, जो मुरादाबाद प्रयोगशाला भेजी गई है। इस रिपोर्ट से यह साफ होगा कि क्या फरमान घटना के समय नशे के प्रभाव में थे।

कानूनी कार्रवाई और जमानत

प्रभारी निरीक्षक जुगुज किशोर के अनुसार:

  • बरामद स्मैक की मात्रा 5 ग्राम थी।

  • कम मात्रा (Personal Consumption श्रेणी) होने के कारण पुलिस ने NDPS एक्ट की धारा 8/22 के तहत FIR दर्ज की थी।

  • नियमानुसार कम मात्रा होने की वजह से आरोपी को थाने से ही जमानत दे दी गई थी।

पूछताछ में कबूला: पुलिस की शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई थी कि फरमान यह स्मैक दिल्ली से खरीदकर लाया था।

अगले कदम

अब पुलिस की नजर मुरादाबाद लैब से आने वाली ब्लड रिपोर्ट पर टिकी है। यदि रिपोर्ट में नशे के सेवन की पुष्टि होती है, तो केस में चार्जशीट और कानूनी कार्यवाही को और मजबूती मिलेगी।

matribhumisamachar.com/

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।