मुंबई. वैश्विक उथल-पुथल और बदलती भू-राजनीतिक व्यवस्था के बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की बढ़ती आर्थिक और कूटनीतिक धमक का लोहा मनवाया है। मुंबई में ‘फ्यूचर इकोनॉमिक कोऑपरेशन काउंसिल’ (FECC) और विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए, उन्होंने वर्तमान वैश्विक स्थिति को ‘ट्विलाइट ज़ोन’ करार दिया।
अशांत दौर और हथियारीकरण की चुनौती
विदेश मंत्री ने अपने बेबाक अंदाज में कहा कि वर्तमान समय शायद हमारे जीवनकाल का सबसे अशांत दौर है, जहाँ पुरानी व्यवस्थाएं ढह रही हैं और नई का निर्माण अभी शेष है। उन्होंने चेतावनी दी कि आज के दौर में राजनीति और अर्थशास्त्र को अलग नहीं किया जा सकता। जयशंकर के अनुसार:
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डेटा, वित्त और उत्पादन का ‘हथियारीकरण’ किया जा रहा है।
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व्यापारिक फैसलों पर अब आर्थिक लाभ से अधिक सुरक्षा संबंधी चिंताएं हावी हैं।
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विकासशील देशों के सामने अस्तित्व और प्रगति की दोहरी चुनौती है।
भारत: एक भरोसेमंद वैश्विक भागीदार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की नई सौदेबाजी की शक्ति का जिक्र करते हुए जयशंकर ने हालिया भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि कैसे भारत के कद्र और साख के कारण अमेरिकी टैरिफ में भारी कटौती संभव हो पाई है।
“भारत अब केवल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) का हिस्सा नहीं है, बल्कि उसे नई दिशा दे रहा है। ‘डी-रिस्किंग’ आज की वैश्विक जरूरत है और भारत दुनिया के लिए एक ‘भरोसेमंद पार्टनर’ के रूप में उभरा है।”
— एस. जयशंकर, विदेश मंत्री
आर्थिक इंजन के रूप में महाराष्ट्र
सम्मेलन में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में विदेश मंत्री ने राज्य के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुंबई जैसे आर्थिक केंद्र भारत के $5$ ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के सपने को हकीकत में बदलने वाले मुख्य ‘इंजन’ हैं। भारत की घरेलू नीतियां जैसे PLI स्कीम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर आज वैश्विक निवेश के लिए सबसे बड़ा आकर्षण हैं।
शिखर सम्मेलन का महत्व
17 से 19 फरवरी तक चलने वाले इस सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को वैश्विक विकास के नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनने के लिए आमंत्रित करना है।
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