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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: चुनाव आयोग का बड़ा ‘प्रशासनिक सर्जिकल स्ट्राइक’, मुख्य सचिव और DGP समेत कई दिग्गज हटाए गए

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कोलकाता. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की बिगुल बजते ही भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल कर दिया है। निष्पक्ष, पारदर्शी और हिंसा मुक्त मतदान सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को दोहराते हुए आयोग ने राज्य के शीर्ष अधिकारियों—मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP)—को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने का आदेश दिया है।

इस कड़ी कार्रवाई ने न केवल राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि बंगाल की चुनावी राजनीति में भी एक नया उबाल ला दिया है।

प्रमुख बदलाव: किसे हटाया गया और किसे मिली कमान?

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक मशीनरी की तटस्थता पर कोई सवाल नहीं उठना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित नियुक्तियां की गई हैं:

पद हटाए गए अधिकारी नए नियुक्त अधिकारी
मुख्य सचिव (CS) नंदिनी चक्रवर्ती दुष्यंत नारियाला (1993 बैच IAS)
गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा संघमित्रा घोष (1997 बैच IAS)
पुलिस महानिदेशक (DGP) पीयूष पांडे सिद्ध नाथ गुप्ता (1992 बैच IPS)
कोलकाता पुलिस आयुक्त (CP) सुप्रतिम सरकार अजय कुमार नंद (1996 बैच IPS)

आयोग का निर्देश: हटाए गए अधिकारियों को चुनाव संपन्न होने तक किसी भी ऐसी जिम्मेदारी में नहीं रखा जाएगा, जिसका सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध चुनाव प्रबंधन से हो।

क्यों लिया गया इतना कड़ा फैसला?

पश्चिम बंगाल का चुनावी इतिहास अक्सर राजनीतिक हिंसा और प्रशासनिक पक्षपात के आरोपों से घिरा रहा है। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि वर्तमान शीर्ष अधिकारी सत्तारूढ़ दल के प्रति नरम रुख अपना सकते हैं।

  • निष्पक्षता का पैमाना: आयोग का मानना है कि ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ (सभी के लिए समान अवसर) तैयार करने के लिए संवेदनशील पदों पर ऐसे अधिकारियों का होना जरूरी है जिनका रिकॉर्ड बेदाग और गैर-राजनीतिक रहा हो।

  • कानून-व्यवस्था: बंगाल में पिछले चुनावों के दौरान हुई हिंसा को देखते हुए, सुरक्षा बलों के समन्वय और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी अब नए नेतृत्व के कंधों पर होगी।

सियासी घमासान: ‘लोकतंत्र की जीत’ बनाम ‘संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग’

चुनाव आयोग के इस आदेश के बाद बंगाल की राजनीति दो धड़ों में बंट गई है:

  1. तृणमूल कांग्रेस (TMC) का रुख: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कदम को “केंद्र सरकार के इशारे पर की गई कार्रवाई” करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा प्रशासनिक फेरबदल के जरिए चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।

  2. भारतीय जनता पार्टी (BJP) व अन्य विपक्ष: विपक्ष ने इस फैसले को “ऐतिहासिक” बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि बंगाल में बिना केंद्रीय हस्तक्षेप और प्रशासनिक शुद्धि के शांतिपूर्ण मतदान संभव नहीं था।

2026 चुनाव का पूरा कार्यक्रम एक नजर में

निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, बंगाल की 294 सीटों पर मतदान दो मुख्य चरणों में संपन्न होगा:

  • पहला चरण: 23 अप्रैल 2026

  • दूसरा चरण: 29 अप्रैल 2026

  • मतगणना और परिणाम: 4 मई 2026

विशेष नोट: इस बार आयोग ने संवेदनशील मतदान केंद्रों पर 100% वेबकास्टिंग और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) की भारी तैनाती का निर्णय लिया है।

क्या हिंसा मुक्त होगा 2026 का चुनाव?

चुनाव आयोग की इस ‘क्लीन-अप’ ड्राइव ने यह संकेत दे दिया है कि वह बंगाल में किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। नए अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती न केवल मतदान को शांतिपूर्ण बनाना है, बल्कि आम जनता के मन से भय को निकालकर उन्हें भारी संख्या में बूथों तक लाना है।

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