तेहरान. मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इजरायली मीडिया और सैन्य सूत्रों ने दावा किया है कि ईरान के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक और सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी (Ali Larijani) को एक सटीक सैन्य हमले में निशाना बनाया गया है।
हालांकि, इस कथित हमले के घंटों बाद भी लारीजानी की स्थिति को लेकर रहस्य बना हुआ है। क्या वे सुरक्षित हैं, घायल हैं या उनकी मृत्यु हो चुकी है—इस पर तेहरान और यरूशलेम के दावों में भारी विरोधाभास दिख रहा है।
इजरायल का बड़ा दावा: “लक्ष्य हासिल हुआ”
इजरायली रक्षा सूत्रों के अनुसार, यह हमला मंगलवार तड़के किया गया। इजरायल का दावा है कि उनके खुफिया इनपुट ने लारीजानी के सटीक ठिकाने की पुष्टि की थी, जिसके बाद हवाई हमला किया गया। इजरायली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस हमले का उद्देश्य ईरान के रणनीतिक नेतृत्व को पूरी तरह पंगु बनाना है।
याद रहे कि यह घटनाक्रम तब हो रहा है जब ईरान पहले ही अपने सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की हालिया मृत्यु (28 फरवरी 2026) के बाद नेतृत्व संकट और युद्ध की चुनौतियों से जूझ रहा है।
ईरान की चुप्पी और ‘धोखे’ का आरोप
ईरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन या वीडियो साक्ष्य जारी नहीं किया गया है। लेकिन हमले से ठीक एक दिन पहले लारीजानी का बयान काफी चर्चा में है। उन्होंने भावुक और कड़े लहजे में कहा था:
“इजरायल ने बातचीत के दौरान धोखे से हमला किया है। हम अपने रुख से पीछे नहीं हटेंगे, चाहे कितनी भी कुर्बानियां देनी पड़ें।”
लारीजानी ने मुस्लिम देशों की चुप्पी पर भी निराशा जताई थी, जो वर्तमान संघर्ष में ईरान के साथ खुलकर खड़े नहीं हुए हैं।
अली लारीजानी ही क्यों थे निशाने पर?
अली लारीजानी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) के प्रमुख रणनीतिकार हैं। खामेनेई के बाद उन्हें देश की सुरक्षा नीतियों का मुख्य वास्तुकार माना जाता है।
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रणनीतिक महत्व: वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सैन्य अभियानों के प्रबंधन में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।
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युद्ध का चेहरा: मौजूदा संघर्ष में वे ईरान की जवाबी कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे थे।
क्या होगा यदि दावों में सच्चाई निकली?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लारीजानी को कुछ होता है, तो यह ईरान के लिए ‘अपूरणीय क्षति’ होगी।
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नेतृत्व का शून्य: ईरान पहले से ही उत्तराधिकार की लड़ाई और बाहरी हमलों के बीच फंसा है।
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क्षेत्रीय अस्थिरता: लेबनान से लेकर यमन तक ईरान समर्थित गुटों के मनोबल पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।
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कड़ी प्रतिक्रिया: ईरान इस हमले को ‘रेड लाइन’ पार करना मानकर इजरायल पर अब तक का सबसे बड़ा मिसाइल हमला कर सकता है।
दुनिया की नजरें तेहरान पर
फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और खुफिया एजेंसियां इस खबर की पुष्टि का इंतजार कर रही हैं। क्या लारीजानी एक बार फिर सामने आकर इन दावों को झुठलाएंगे, या ईरान अपने एक और बड़े योद्धा को खो चुका है? यह आने वाले कुछ घंटे साफ कर देंगे।
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