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शिवसेना यूबीटी में टूट की अटकलें: दिल्ली में गरजे संजय राउत, बागी सांसदों को दी खुली चुनौती और लगाए 15-15 करोड़ के आरोप

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शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों और बीजेपी पर निशाना साधते हुए।

मुंबई । बुधवार, 17 जून 2026

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है। साल 2022 में एकनाथ शिंदे की अगुवाई में हुई ऐतिहासिक बगावत के जख्म अभी पूरी तरह भरे भी नहीं थे कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के संसदीय दल में एक बार फिर बड़ी टूट की खबरें सुर्खियों में हैं। इस बार संकट लोकसभा सांसदों को लेकर है। चर्चाएं गर्म हैं कि शिवसेना यूबीटी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद बागी हो चुके हैं और वे पाला बदलकर पाटने या शिंदे गुट (असली शिवसेना) के साथ जाने की तैयारी में हैं।

इस सियासी ड्रामे और ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं के बीच, बुधवार को दिल्ली में पार्टी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के आवास पर एक बेहद तल्ख प्रेस कॉन्फ्रेंस (PC) आयोजित की गई। इस पीसी में संजय राउत के साथ केवल तीन लोकसभा सांसद—अरविंद सावंत, अनिल देसाई और नासिक से सांसद राजाभाऊ वाजे—ही मौजूद रहे। बाकी 6 सांसदों की अनुपस्थिति ने इन अटकलों को और अधिक हवा दे दी है।

‘कसम खाई थी, अगर दगा दिया तो छोड़ेंगे नहीं’: संजय राउत

प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय राउत बेहद आक्रामक नजर आए। उन्होंने बागी होने की अफवाहों के बीच अपने सांसदों को कड़ी चेतावनी देते हुए भावुक और तल्ख अंदाज में कहा:

“मैं अभी भी मानता हूं कि हमारे सभी सांसद एक साथ हैं। लेकिन यदि किसी को जाने का इतना ही शौक है, तो वह पहले सांसद पद से सम्मान के साथ इस्तीफा दे और फिर से चुनाव जीतकर दिखाए। हमारे जमीनी कार्यकर्ताओं ने इन सांसदों को जिताने के लिए अपना खून-पसीना बहाया है। पार्टी ने अपनी औकात से बढ़कर इन्हें टिकट दिया, फंड दिया और उद्धव ठाकरे के चेहरे पर ये चुनाव जीते हैं। आप जनता और वोटरों के साथ ऐसा धोखा नहीं कर सकते।”

संजय राउत ने आगे एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि 14 तारीख को हुई पार्टी की बैठक में चार सांसद व्यक्तिगत रूप से और बाकी ऑनलाइन जुड़े थे। राउत के अनुसार, “दो सांसदों ने साईं बाबा, मां भवानी और अपनी सगे मां-बेटी की कसमें खाई थीं कि वे पार्टी के साथ वफादार रहेंगे। अगर इसके बाद भी कोई दगा देता है और पीठ में छुरा घोंपता है, तो महाराष्ट्र की जनता और शिवसेना उन्हें कभी माफ नहीं करेगी और हम उन्हें कानूनी व राजनीतिक रूप से छोड़ेंगे नहीं।”

बीजेपी पर 15-15 करोड़ रुपये के ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ का गंभीर आरोप

संजय राउत ने महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे इस संकट के पीछे सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हाथ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने जनतंत्र को एक ‘बाजार’ बनाकर रख दिया है।

राउत ने दावा किया कि उनके पास पुख्ता जानकारी है कि पाला बदलने के लिए कुछ सांसदों को 15-15 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि (Advance) दी गई है और यह पूरी डील करीब 50 करोड़ रुपये की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह पश्चिम बंगाल में टीएमसी को तोड़ने की कोशिशें की गईं, उसी तर्ज पर महाराष्ट्र में भी जनादेश का अपमान किया जा रहा है। राउत ने चुनौती देते हुए कहा कि बीजेपी बताए कि सांसदों को खरीदने के लिए क्या रेट तय किए गए हैं।

संविधान की उड़ रही हैं धज्जियां: अरविंद सावंत और अनिल देसाई

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद वरिष्ठ सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि देश में हर रोज संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिवसेना यूबीटी ने लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) ओम बिरला को एक आधिकारिक पत्र भेजा है, जिसमें मांग की गई है कि जो कुछ भी हो, वह देश के संविधान और दलबदल विरोधी कानून के नियमों के तहत होना चाहिए।

वहीं, अनिल देसाई ने भी मीडिया में आ रही पैसों के लेनदेन की खबरों पर चिंता जताई और कहा कि हम इन सभी परिस्थितियों पर बारीक नजर रख रहे हैं और पार्टी कानूनी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है।

‘मैं उद्धव जी के साथ हूं और रहूंगा’: राजाभाऊ वाजे

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नासिक से शिवसेना यूबीटी के सांसद राजाभाऊ वाजे काफी भावुक दिखाई दिए। उनकी आंखों में आंसू तैर आए, लेकिन उन्होंने पूरी मजबूती से बगावत की खबरों का खंडन किया। वाजे ने कहा:

“मैं केवल एक कमेटी की बैठक के सिलसिले में दिल्ली आया हूँ। मेरा किसी भी अन्य गुट या शिंदे जी से कोई संपर्क नहीं हुआ है, न ही मुझे कोई कॉल आया है। मैं उद्धव जी के साथ था, हूँ और हमेशा उनके साथ ही रहूंगा। बगावत की खबरों में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है।”

सांसदों की स्थिति: कौन उद्धव के साथ और किन पर संशय?

नीचे दी गई तालिका से समझिए कि शिवसेना यूबीटी के 9 लोकसभा सांसदों में वर्तमान स्थिति क्या बनी हुई है:

उद्धव ठाकरे के प्रति वफादार (मौजूद सांसद) बागी होने की आशंका (संदेह के घेरे में)
1. अरविंद सावंत (लोकसभा में पक्ष नेता) 1. नागेश पाटील आष्टीकर
2. अनिल देसाई (पार्टी सचिव व सांसद) 2. संजय उत्तमराव देशमुख
3. राजाभाऊ वाजे (नासिक से सांसद) 3. ओमराजे निंबालकर
4. संजय (बंडू) जाधव
5. संजय दीना पाटिल
6. भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे

आगे क्या होगा? कानूनी और रणनीतिक दांवपेच

शिवसेना यूबीटी ने इस संभावित बगावत को रोकने और बागियों को कानूनी पचड़े में फंसाने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी ने गुरुवार (कल) सुबह 11 बजे एक महत्वपूर्ण पार्लियामेंट्री (संसदीय) बैठक बुलाई है, जिसके लिए सभी सांसदों को अनिवार्य रूप से उपस्थित होने का व्हिप (Whip) जारी किया जा सकता है।

हालांकि कुछ सूत्रों का दावा था कि बागी सांसद दिल्ली में लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर सकते हैं, लेकिन बुधवार शाम तक ऐसी किसी मुलाकात की पुष्टि नहीं हुई। राजनीति के जानकारों का मानना है कि यदि 6 सांसद एक साथ अलग गुट नहीं बनाते हैं, तो दलबदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द होने का खतरा मंडराता रहेगा। महाराष्ट्र की इस महा-सियासी जंग में अगले 24 घंटे बेहद निर्णायक होने वाले हैं।

सटीकता

  1. सच्चाई बनाम कयास: हालांकि मीडिया और सूत्रों के हवाले से 6 सांसदों के बागी होने की बात कही जा रही है, लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी भी सांसद ने शिंदे गुट में शामिल होने या शिवसेना यूबीटी से नाता तोड़ने का लिखित या सार्वजनिक ऐलान नहीं किया है।

  2. शपथ की क्रोनोलॉजी: संजय राउत के अनुसार, कसम खाने की यह घटना 14 तारीख को मातोश्री या पार्टी की आंतरिक बैठक में हुई थी, जिसे अब सार्वजनिक किया गया है ताकि सांसदों पर नैतिक और सामाजिक दबाव बनाया जा सके।

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