परभणी | अपडेटेड : बुधवार, 29 जुलाई 2026
भारतीय रेलवे ने देश भर में अपने अवसंरचनात्मक ढांचे (Infrastructure) को मजबूत बनाने और ट्रेनों के सुरक्षित व तीव्र संचालन के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। रेलवे बोर्ड द्वारा दक्षिण मध्य रेलवे (South Central Railway – SCR) के नांदेड मंडल में स्थित परभणी-मुदखेड़ दोहरी लाइन खंड (Parbhani-Mudkhed Double Line Section) पर विद्युत कर्षण प्रणाली (Electric Traction System) के आधुनिकीकरण को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है।
₹163 करोड़ की कुल लागत से स्वीकृत इस महत्वाकांक्षी परियोजना में आधुनिक बिजली आपूर्ति स्थापना कार्य (Power Supply Infrastructure) भी शामिल हैं।
164 किलोमीटर मार्ग पर 2×25 kV प्रणाली की होगी तैनाती
इस परियोजना के अंतर्गत लगभग 164 ट्रैक किलोमीटर लंबे रेलखंड में वर्तमान में चालू 1×25 kV प्रणाली को हटाकर अत्याधुनिक 2×25 kV उच्च-क्षमता विद्युत कर्षण प्रणाली में परिवर्तित किया जाएगा। बढ़े हुए पावर लोड को संभालने के लिए पावर सब-स्टेशनों और संबंधित पावर ग्रिड सप्लाई उपकरणों को भी नई तकनीक से लैस किया जा रहा है।
रणनीतिक रूप से अहम ‘HUN Route-9’ का हिस्सा
परभणी–मुदखेड़ रेलमार्ग कोई सामान्य मार्ग नहीं है। यह भारतीय रेलवे के अत्यंत व्यस्त और सामरिक महत्व वाले हाई यूटिलाइज्ड नेटवर्क रूट-9 (HUN Route-9) की महत्वपूर्ण कड़ी है। यह कॉरिडोर मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के प्रमुख व्यापारिक व सांस्कृतिक केंद्रों को आपस में जोड़ता है, जिसमें शामिल हैं:
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अजमेर – इंदौर – खंडवा
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अकोला – पूर्णा – मुदखेड़
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सिकंदराबाद – महबूबनगर – धोन
परियोजना से क्या होंगे बड़े फायदे?
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वंदे भारत एक्सप्रेस का सुगम संचालन: सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों (जैसे वंदे भारत) को निरंतर और उच्च-वोल्टेज बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होती है। 2×25 kV पावर सिस्टम से ट्रिपिंग या वोल्टेज ड्रॉप की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
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माल ढुलाई (Freight Loading) में भारी उछाल: भारी और लंबी मालगाड़ियों को खींचने के लिए अत्यधिक विद्युत शक्ति मिलेगी।
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मिशन 2029-30 को संबल: भारतीय रेलवे ने वर्ष 2029-30 तक सालाना 3,000 मिलियन टन (MT) माल ढुलाई का विशाल लक्ष्य तय किया है। यह नया इंफ्रास्ट्रक्चर उस राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. 1×25 kV और 2×25 kV ट्रैक्शन प्रणाली में क्या अंतर है?
उत्तर: 1×25 kV प्रणाली में पावर सब-स्टेशनों की दूरी कम रखनी पड़ती है और भारी ट्रेनों पर वोल्टेज ड्रॉप की समस्या आती है। इसके विपरीत, 2×25 kV प्रणाली उच्च पावर सप्लाई क्षमता देती है, जिससे दूर-दूर सब-स्टेशन बनाए जा सकते हैं और भारी मालगाड़ियों तथा हाई-स्पीड ट्रेनों का संचालन बिना किसी पावर ब्रेकडाउन के संभव होता है।
Q2. परभणी-मुदखेड़ रेल परियोजना की कुल लागत कितनी है?
उत्तर: इस परियोजना की कुल स्वीकृत लागत ₹163 करोड़ है।
Q3. यह रेलखंड किस रेलवे ज़ोन और डिवीज़न के अंतर्गत आता है?
उत्तर: यह रेलखंड दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) के नांदेड मंडल के अधीन आता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह लेख भारतीय रेलवे और रेल मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्तियों व सार्वजनिक सूचनाओं के आधार पर केवल सूचनात्मक एवं शैक्षणिक उद्देश्यों से तैयार किया गया है। परियोजना से जुड़े समय-सारणी या बजट संबंधी अद्यतन आंकड़ों के लिए भारतीय रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ।
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