नागपुर । शुक्रवार, 17 जुलाई 2026
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान सामग्री के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं (चोरी/गबन) को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आया हुआ है। विपक्षी दल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) इस मुद्दे को लेकर लगातार सत्तापक्ष पर हमलावर है। इसी कड़ी में पार्टी ने 18 जुलाई को नागपुर में एक बड़े ‘राम रक्षा आंदोलन’ का ऐलान किया है।
इस आंदोलन को लेकर सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस अभियान में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक (प्रमुख) मोहन भागवत को भी निमंत्रण पत्र भेज दिया।
नागपुर के राम मंदिर में शाम 4:30 बजे से जुटेगा हुजूम
शिवसेना (यूबीटी) का यह आंदोलन 18 जुलाई को शाम 4:30 बजे नागपुर के रामनगर स्थित प्रसिद्ध राम मंदिर में आयोजित होने जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मुंबई के दादर से शुरू हुए इस आंदोलन के दूसरे चरण में नागपुर में हजारों की संख्या में राम भक्त और शिवसैनिक जुटेंगे। कार्यक्रम के दौरान ‘राम रक्षा स्तोत्र’, ‘हनुमान स्तोत्र’ और ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ किया जाएगा, ताकि भगवान राम की पवित्रता और जन-आस्था की रक्षा की जा सके।
संजय राउत ने पत्र में मोहन भागवत से क्या कहा?
शुक्रवार (17 जुलाई) को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को लिखे अपने पत्र में संजय राउत ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अयोध्या राम मंदिर में दान और चढ़ावे के कथित गबन व दुरुपयोग ने दुनिया भर के करोड़ों हिंदुओं की आस्था और विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है।
राउत ने लिखा, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी पहले इस कथित गबन पर दुख व्यक्त किया था, लेकिन हैरानी की बात है कि इस मामले के मुख्य आरोपियों के खिलाफ अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे समय में जब हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है, हिंदू समाज को एक बार फिर से एकजुट और सक्रिय करना बेहद जरूरी हो गया है।”
उन्होंने संघ प्रमुख से व्यक्तिगत रूप से इस आंदोलन में उपस्थित होकर श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद देने का आग्रह किया है। साथ ही यह भी कहा कि यदि किसी अपरिहार्य कारण से वे न आ पाएं, तो अपने किसी वरिष्ठ प्रतिनिधि को जरूर भेजें।
देवेंद्र फडणवीस को भी ‘राम भक्त’ बताकर भेजा निमंत्रण
मोहन भागवत से पहले संजय राउत ने 15 जुलाई को महाराष्ट्र के वरिष्ठ भाजपा नेता और राज्य के गृहमंत्री/उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी इसी तरह का आमंत्रण पत्र भेजा था। चूंकि नागपुर देवेंद्र फडणवीस का गृह क्षेत्र भी है, इसलिए शिवसेना (यूबीटी) ने उन्हें ‘भगवान राम का परम भक्त’ बताते हुए इस अभियान का हिस्सा बनने का आग्रह किया। राउत का कहना है कि यह पहल किसी राजनीतिक विरोध के लिए नहीं, बल्कि भगवान राम की गरिमा की रक्षा और जनता के बीच पारदर्शिता के लिए है।
क्या है इस आंदोलन के पीछे की राजनीति?
महाराष्ट्र में आगामी चुनावों को देखते हुए शिवसेना (यूबीटी) का यह दांव बेहद सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राम मंदिर आंदोलन का मुख्य चेहरा रही भाजपा और संघ परिवार को उन्हीं के गढ़ (नागपुर) में राम मंदिर के मुद्दे पर घेरना एक बड़ा राजनीतिक कदम है। उद्धव ठाकरे पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि राम मंदिर में कथित लूट और चोरी के खिलाफ पार्टी का यह देशव्यापी और राज्यव्यापी आंदोलन थमने वाला नहीं है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. शिवसेना (यूबीटी) का ‘राम रक्षा आंदोलन’ नागपुर में कब और कहाँ है?
Ans: यह आंदोलन 18 जुलाई को शाम 4:30 बजे, रामनगर स्थित राम मंदिर, नागपुर में आयोजित किया जाएगा।
Q2. संजय राउत ने मोहन भागवत को क्यों आमंत्रित किया है?
Ans: संजय राउत के अनुसार, राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं से हिंदुओं की आस्था आहत हुई है। हिंदू समाज को एकजुट करने और पारदर्शिता की मांग के लिए उन्होंने संघ प्रमुख को आमंत्रित किया है ताकि वे अपना समर्थन या आशीर्वाद दे सकें।
Q3. क्या इस आंदोलन में उद्धव ठाकरे भी शामिल होंगे?
Ans: हाँ, पार्टी सूत्रों के अनुसार शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के भी नागपुर में होने वाले इस आंदोलन के चरण में शामिल होने की पूरी संभावना है।
Disclaimer (अस्वीकरण)
यह लेख राजनीतिक घटनाक्रमों और संबंधित नेताओं द्वारा जारी किए गए बयानों व पत्रों के आधार पर तैयार की गई एक समाचार रिपोर्ट है। इसका उद्देश्य किसी भी धार्मिक या राजनीतिक संगठन की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। पाठक कृपया नवीनतम आधिकारिक बयानों के लिए अधिकृत मीडिया स्रोतों का संदर्भ लें।
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