नई दिल्ली । शुक्रवार, 17 जुलाई 2026
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की राष्ट्रव्यापी रिलीज को हरी झंडी दे दी है। हालांकि, कोर्ट ने संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आदेश दिया है कि इस फिल्म को भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथ यात्रा उत्सव (जो 16 जुलाई से 27 जुलाई 2026 तक संचालित है) के संपन्न होने के बाद, यानी 28 जुलाई या उसके बाद ही सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जाएगा।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने उड़ीसा हाईकोर्ट द्वारा लगाए गए अंतरिम प्रतिबंध को हटाते हुए यह संतुलित रास्ता निकाला है, जिससे फिल्म निर्माताओं को बड़ी राहत मिली है।
फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ विवाद की मुख्य वजह
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने फिल्म के ट्रेलर और दृश्यों पर आपत्ति जताई। उड़ीसा हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) में यह दलील दी गई थी कि:
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शास्त्रों के विपरीत चित्रण: याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ के बचपन, उनके संवादों और युद्ध के दृश्यों का काल्पनिक चित्रण ‘स्कंद पुराण’ और ‘ब्रह्म पुराण’ के धार्मिक ग्रंथों तथा सदियों पुरानी मंदिर परंपराओं के अनुकूल नहीं है।
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धार्मिक भावनाएं आहत होने का तर्क: आरोप था कि इस तरह का प्रदर्शन करोड़ों जगन्नाथ भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचा सकता है।
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कानून-व्यवस्था की स्थिति: रथ यात्रा जैसे अत्यंत संवेदनशील और पावन धार्मिक उत्सव के दौरान इस फिल्म के आने से सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई गई थी।
इसी के आधार पर उड़ीसा हाईकोर्ट ने रिलीज से ठीक एक दिन पहले फिल्म के प्रदर्शन पर देशव्यापी अंतरिम रोक लगा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट का रुख: “काल्पनिक एनिमेशन से भक्ति कम नहीं होती”
हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ निर्माता कंपनी ‘एली एनिमेशन्स’ (Ele Animations) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। निर्माताओं के वकील देवदत्त कामत ने दलील दी कि:
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फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा पहले ही ‘U’ (यूनिवर्सल) सर्टिफिकेट दिया जा चुका है।
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यह फिल्म इसी नाम की एक लोकप्रिय यूट्यूब (YouTube) वेब सीरीज पर आधारित है, जिसे पिछले दो वर्षों में 100 करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है और इससे कभी कोई विवाद नहीं हुआ।
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फिल्म का उद्देश्य बच्चों के मन में भगवान के प्रति भक्ति भाव जगाना है, न कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “भक्ति हर व्यक्ति की आंतरिक भावना है। क्या एक एनिमेटेड फिल्म किसी की भक्ति को कम कर सकती है? कोई काल्पनिक फिल्म पूरी तरह से स्कंद पुराण या ब्रह्म पुराण के अनुरूप कैसे हो सकती है… यह केवल कल्पना का काम है।”
हालांकि, राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा रथ यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था और पुरी के गजपति महाराज व मंदिर प्रशासन की कुछ आपत्तियों का हवाला दिए जाने के बाद, कोर्ट ने बीच का रास्ता चुना। कोर्ट ने फिल्म की रिलीज को रथ यात्रा उत्सव (27 जुलाई) खत्म होने तक टालने का आदेश दिया और 28 जुलाई से इसे देशभर में रिलीज करने की अनुमति दे दी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ अब सिनेमाघरों में कब रिलीज होगी?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, यह फिल्म रथ यात्रा उत्सव समाप्त होने के बाद 28 जुलाई 2026 या उसके बाद देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज की जा सकती है।
प्रश्न 2: उड़ीसा हाईकोर्ट ने फिल्म पर अंतरिम रोक क्यों लगाई थी?
उत्तर: कुछ सामाजिक संगठनों ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ का चित्रण पौराणिक ग्रंथों (स्कंद और ब्रह्म पुराण) के खिलाफ है और इससे रथ यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था की समस्या हो सकती है।
प्रश्न 3: क्या फिल्म को सेंसर बोर्ड की मंजूरी मिली हुई है?
उत्तर: हाँ, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने इस फिल्म को जांच परख के बाद हिंदी, ओडिया और तेलुगु भाषाओं के लिए ‘U’ (Universal) सर्टिफिकेट जारी किया है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। अदालती कार्यवाही और कानूनी फैसलों से जुड़ी सटीक एवं अद्यतन जानकारी के लिए कृपया आधिकारिक न्यायिक दस्तावेजों का संदर्भ लें।
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