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शीर्षक: धार्मिक स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जुलूस के लिए मनपसंद रास्ता मौलिक अधिकार नहीं

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नागपुर । गुरुवार, 27 अगस्त 2026
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ (Justice Anil S. Kilor व Justice Rajnish R. Vyas की बेंच) ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 (Article 25) के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या प्रस्तुत की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि संविधान के तहत धर्म का पालन करने और उसका प्रचार-प्रसार करने का अधिकार मौलिक है, लेकिन किसी व्यक्ति या धार्मिक संगठन को किसी विशेष मार्ग (Specific Route) से जुलूस निकालने का कोई मौलिक अधिकार नहीं प्राप्त है।

क्या था पूरा मामला?

यह विवाद कांवड़ यात्रा के लिए प्रस्तावित लगभग 3.5 किलोमीटर लंबे मार्ग की अनुमति न मिलने से जुड़ा हुआ था। याचिकाकर्ता (दीपक देवदास नेचवानी) ने नागपुर पुलिस कमिश्नर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें जुलूस को संवेदनशील क्षेत्रों से ले जाने की अनुमति खारिज कर पुलिस द्वारा एक वैकल्पिक मार्ग सुझाया गया था।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और किसी सार्वजनिक मार्ग पर किसी अन्य समुदाय के निवास या प्रार्थना स्थल होने मात्र से जुलूस का रास्ता नहीं रोका जा सकता।

बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियाँ

  1. अधिकार और माध्यम में अंतर: अदालत ने कहा कि “धर्म का पालन करने का अधिकार एक बात है और उसे किसी खास तरीके या मार्ग से पूरा करने की जिद करना दूसरी बात है।”
  2. सार्वजनिक व्यवस्था सर्वोपरि: अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order), कानून-व्यवस्था और समाज के अन्य वर्गों के हितों व सुरक्षा के अधीन हैं।
  3. प्रशासन का विवेकाधिकार: स्थानीय परिस्थितियों, भौगोलिक संरचना और अतीत में हुई सांप्रदायिक या कानून-व्यवस्था की घटनाओं का आकलन करके वैकल्पिक मार्ग सुझाना पूरी तरह से पुलिस प्रशासन का अधिकार है।
  4. प्रतिबंध नहीं, केवल मार्ग परिवर्तन: कोर्ट ने माना कि प्रशासन ने यात्रा या धार्मिक अनुष्ठान पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई थी, बल्कि केवल सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को देखते हुए मार्ग बदला था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: क्या अनुच्छेद 25 के तहत किसी भी रास्ते से जुलूस निकालना हमारा मौलिक अधिकार है?
उत्तर: नहीं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 25 के तहत धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है, लेकिन किसी विशेष सार्वजनिक मार्ग से जुलूस निकालने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।
प्रश्न 2: क्या पुलिस धार्मिक जुलूस का रास्ता बदल सकती है?
उत्तर: हाँ, यदि कानून-व्यवस्था, यातायात, सुरक्षा या क्षेत्र की संवेदनशीलता का मुद्दा हो, तो पुलिस प्रशासन के पास वैकल्पिक मार्ग (Alternate Route) तय करने का पूरा अधिकार है।
प्रश्न 3: क्या यह निर्णय कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगाता है?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक यात्रा पर कोई प्रतिबंध नहीं था, केवल मार्ग में बदलाव किया गया था।
अस्वीकरण: यह लेख न्यायालय के आदेशों और कानूनी तथ्यों की जानकारी देने के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसे किसी प्रकार की कानूनी सलाह (Legal Advice) न माना जाए। किसी भी कानूनी कार्यवाही या निर्णय के लिए योग्य कानून विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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