रविवार, सितंबर 20 2026 | 05:11:20 PM

SBI ग्राहकों के लिए खुशखबरी: अब ₹5 लाख तक के ऑनलाइन IMPS ट्रांजैक्शन पर नहीं लगेगा कोई चार्ज, जानें नए नियम

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने करोड़ों ग्राहकों को डिजिटल बैंकिंग का तोहफा देते हुए ऑनलाइन फंड ट्रांसफर के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। अगर आप भी एसबीआई के ग्राहक हैं और अक्सर पैसों का लेन-देन करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बैंक ने अब इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और YONO ऐप के जरिए किए जाने वाले IMPS (Immediate Payment Service) ट्रांजैक्शन को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं।

डिजिटल ट्रांजैक्शन पर ‘जीरो’ शुल्क

डिजिटल इंडिया अभियान को मजबूती देने और ग्राहकों को शाखाओं की भीड़ से बचाने के लिए SBI ने ₹5 लाख तक के ऑनलाइन IMPS ट्रांजैक्शन पर लगने वाले शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।

पहले ₹2 लाख से ₹5 लाख तक के ट्रांजैक्शन पर शुल्क देना पड़ता था, लेकिन अब नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप (YONO) के जरिए यह सेवा पूरी तरह निःशुल्क (Free) कर दी गई है। इसके साथ ही NEFT और RTGS जैसे ऑनलाइन माध्यम पहले से ही फ्री हैं।

बैंक शाखा से ट्रांजैक्शन पर लगेगा चार्ज

बैंक ने स्पष्ट किया है कि शुल्क में यह छूट केवल डिजिटल माध्यमों के लिए है। यदि कोई ग्राहक बैंक की शाखा (Branch) में जाकर किसी अधिकारी के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करवाता है, तो उसे निर्धारित सेवा शुल्क और GST देना होगा।

ब्रांच से IMPS ट्रांजैक्शन के लिए चार्ज टेबल:

| अमाउंट स्लैब | सर्विस चार्ज (GST अतिरिक्त) |

| :— | :— |

| ₹1,000 तक | कोई शुल्क नहीं (Nil) |

| ₹1,001 से ₹10,000 तक | ₹2 + GST |

| ₹10,001 से ₹1,00,000 तक | ₹4 + GST |

| ₹1,00,001 से ₹2,00,000 तक | ₹12 + GST |

| ₹2,00,001 से ₹5,00,000 तक | ₹20 + GST |

IMPS क्यों है खास?

IMPS यानी ‘इमिडिएट पेमेंट सर्विस’ एक ऐसी सुविधा है जिसके जरिए आप 24 घंटे और 365 दिन (छुट्टियों के दिन भी) तुरंत पैसे भेज सकते हैं। NEFT में कभी-कभी पैसा पहुँचने में समय लगता है, लेकिन IMPS में रियल-टाइम ट्रांसफर होता है। अब ₹5 लाख तक की बढ़ी हुई सीमा और शून्य शुल्क के कारण यह आम लोगों के लिए सबसे पसंदीदा विकल्प बनकर उभरा है।

सावधानी भी जरूरी

SBI ने ग्राहकों को सलाह दी है कि डिजिटल ट्रांजैक्शन करते समय सावधानी बरतें। चूंकि IMPS में पैसा पलक झपकते ही दूसरे खाते में पहुँच जाता है, इसलिए लाभार्थी (Beneficiary) की खाता संख्या और IFSC कोड भरते समय दोबारा जांच जरूर करें। किसी भी अनजान लिंक या ओटीपी (OTP) को साझा न करें।

मातृभूमि समाचार की सलाह: बैंक से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए हमेशा SBI की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत मोबाइल ऐप का ही उपयोग करें।

यह भी पढ़ें : 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में RSS की भागीदारी: जवाहरलाल नेहरू के निमंत्रण की पूरी कहानी

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।