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शेयर बाजार में लगातार 6 हफ्ते गिरावट: क्या 2026 की यह मंदी खरीदारी का सही मौका है?

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

मुंबई ।

वर्ष 2026 में भारतीय इक्विटी बाजार इस समय अपने सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। 18 सितंबर 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में दलाल स्ट्रीट पर मंदी का माहौल हावी रहा और बेंचमार्क सूचकांकों ने लगातार छठे सप्ताह लाल निशान में बंद होकर वर्ष 2020 के बाद की अपनी सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की।

हालांकि शुक्रवार के कारोबारी सत्र में निचले स्तरों से रिकवरी देखने को मिली और Nifty 50 में थोड़ी मजबूती आई, लेकिन पूरे सप्ताह के दौरान बना दबाव खत्म नहीं हो सका।

18 सितंबर 2026: कैसा रहा बाजार का हाल?

शुक्रवार को कारोबार के अंत में बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला:

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  • Nifty 50: 23,346.40 अंक (+0.33%)

  • Sensex: 74,294.96 अंक (-0.03%)

पूरे कारोबारी सप्ताह (Weekly Performance) के दौरान Nifty में लगभग 0.22% और Sensex में करीब 0.65% की कुल गिरावट दर्ज की गई।

बाजार पर दबाव के 5 प्रमुख कारण

भारतीय शेयर बाजार में बनी इस मंदी के पीछे घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के कारण जिम्मेदार हैं:

  1. कच्चे तेल (Brent Crude) की बढ़ती कीमतें: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की मजबूती से भारत के चालू खाते के घाटे (CAD), कंपनियों के मार्जिन और महंगाई पर विपरीत असर पड़ रहा है।

  2. पश्चिम एशिया (West Asia) में तनाव: भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण वैश्विक निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स पर दिख रहा है।

  3. वैश्विक ब्याज दरें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: अमेरिका में ब्याज दरों के उच्च स्तर पर बने रहने की संभावना और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती के चलते FII (विदेशी संस्थागत निवेशक) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं।

  4. Primary Market (IPO) का दबाव: बड़े और आकर्षक IPOs के बाजार में आने से रिटेल व संस्थागत निवेशकों का फंड प्राइमरी मार्केट की ओर डायवर्ट हो रहा है, जिससे सेकेंडरी मार्केट में लिक्विडिटी की कमी देखी जा रही है।

  5. IT और Tata Group के शेयरों में बिकवाली: आईटी कंपनियों के कमजोर आउटलुक और टाटा समूह से जुड़ी कॉर्पोरेट खबरों के कारण TCS और अन्य दिग्गज शेयरों में गिरावट ने सूचकांकों पर लगातार दबाव बनाए रखा।

Nifty 50 और Sensex के लिए अगले हफ्ते के अहम स्तर (Key Levels)

अगले सप्ताह बाजार में ट्रेडिंग या निवेश करने से पहले इन महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों (Technical Levels) पर ध्यान देना आवश्यक है:

  • Nifty 50 Support: 23,200 – 23,250 (यदि यह सपोर्ट टूटता है, तो निफ्टी 23,000 के स्तर का परीक्षण कर सकता है)।

  • Nifty 50 Resistance: 23,500 – 23,650 (मंदी के ट्रेंड को बदलने के लिए Nifty का 23,650 के ऊपर मजबूती से टिकना जरूरी है)।

प्रासंगिक लिंक्स और अतिरिक्त पढ़ें (Relevant Links)

  • बाजार की दैनिक खबरों और आर्थिक अपडेट्स के लिए पढ़ें: Matribhumi Samachar Business News

  • वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर असर जानने के लिए विजिट करें: Matribhumi Samachar India World Analysis

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: सितंबर 2026 में भारतीय शेयर बाजार क्यों गिर रहा है?

उत्तर: वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, FII द्वारा की जा रही बिकवाली और प्राथमिक बाजार (IPO) में फंड का डायवर्जन इस गिरावट के मुख्य कारण हैं।

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Q2: क्या यह गिरावट 2020 के क्रैश जैसी है?

उत्तर: यह समय अवधि के लिहाज से 2020 के बाद की सबसे लंबी लगातार गिरावट (6 सप्ताह) जरूर है, लेकिन यह एक नियंत्रित करेक्शन (Controlled Correction) है, न कि पैनिक क्रैश।

Q3: निवेशकों को इस बाजार में क्या रणनीति अपनानी चाहिए?

उत्तर: एकमुश्त (Lump sum) भारी निवेश से बचें। केवल मजबूत फंडामेंटल वाले बैंकिंग, एफएमसीजी और मेटल सेक्टर के क्वालिटी शेयरों में SIP या चरणबद्ध (SIP/Phased Investment) तरीके से खरीदारी करें।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश करने या ट्रेडिंग निर्णय लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार (SEBI Registered Financial Advisor) से परामर्श अवश्य लें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।