शिमला. हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होते ही प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया है। नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा ने सुक्खू सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री पर सदन को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया है। भाजपा का दावा है कि सरकार ने अपनी फ्लैगशिप योजनाओं के जो आंकड़े पेश किए हैं, उनमें भारी विसंगतियां हैं।
🚨 विधानसभा के बाहर और भीतर प्रदर्शन
सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में जोरदार नारेबाजी की। विपक्ष का सीधा हमला मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर है। जयराम ठाकुर ने विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को नियम-75 के तहत विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस सौंपते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पिछले तीन साल से सदन और जनता के सामने असत्य तथ्य रख रहे हैं।
📉 आंकड़ों का गणित: कहाँ फंसी सुक्खू सरकार?
भाजपा ने सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। मुख्य रूप से ‘महिला सम्मान निधि’ और ‘सुख आश्रय’ योजना को लेकर सरकार को घेरा गया है:
| योजना का नाम | सरकार का दावा (लाभार्थी) | विपक्ष का तर्क/सवाल |
| महिला सम्मान निधि | 35,687 लाभार्थी | ₹7.42 करोड़ का खर्च दिखाया गया, जबकि गणित के हिसाब से यह ₹5.35 करोड़ होना चाहिए। |
| सुख आश्रय योजना | 4,131 कुल बच्चे | केवल 114 बच्चों को ही शैक्षणिक भ्रमण का लाभ मिला। |
| गोबर खरीद योजना | राज्यव्यापी अभियान | एक किसान को साल भर में औसतन मात्र ₹862 का लाभ। |
विपक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि कृषि योजनाओं में किसानों की भागीदारी महज 0.18% रह गई है, जो सरकार की “नीतिगत विफलता” का प्रमाण है।
💰 ‘केंद्र की मदद बनाम राज्य का रोना’
जयराम ठाकुर ने केंद्र और राज्य के बीच के वित्तीय संबंधों पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि:
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मोदी सरकार ने हिमाचल को ₹89,000 करोड़ का राजस्व घाटा अनुदान दिया है।
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तुलनात्मक रूप से मनमोहन सिंह सरकार के समय यह केवल ₹18,000 करोड़ था।
भाजपा का आरोप है कि इतनी बड़ी मदद मिलने के बावजूद राज्य सरकार अपनी नाकामियों का ठीकरा केंद्र पर फोड़ रही है और केवल होर्डिंग्स-विज्ञापनों तक सीमित होकर रह गई है।
⚖️ क्या होगा विशेषाधिकार हनन नोटिस का?
अब सबकी नजरें विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया पर हैं। यदि अध्यक्ष इस नोटिस को स्वीकार करते हैं, तो इसे ‘विशेषाधिकार समिति’ को भेजा जा सकता है। इसमें दोषी पाए जाने पर संबंधित सदस्य के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान होता है।
“मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति अगर सदन में गलत आंकड़े पेश करता है, तो यह लोकतंत्र का अपमान है। हम चुप नहीं बैठेंगे।” — जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष
💡 क्या आप जानते हैं? (Quick Fact)
नियम-75 (विशेषाधिकार हनन): यह तब लाया जाता है जब कोई सदस्य यह मानता है कि किसी मंत्री या सदस्य ने सदन में गलत जानकारी देकर सदन की गरिमा का उल्लंघन किया है।
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