नई दिल्ली । मंगलवार, 18 अगस्त 2026
भारत ने अपनी समुद्री निगरानी (Maritime Surveillance) और अनमैन्ड डिफेंस क्षमताओं (Unmanned Defence Capabilities) को अभूतपूर्व मजबूती देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में भारतीय रक्षा मंत्रालय और अमेरिकी रक्षा दिग्गज General Atomics Aeronautical Systems Inc. (GA-ASI) के बीच दो MQ-9B SeaGuardian High-Altitude Long-Endurance (HALE) रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम्स को लीज पर लेने का समझौता संपन्न हुआ।
यह समझौता 30 महीने की अवधि के लिए किया गया है, जिसकी कुल लागत लगभग ₹1,943 करोड़ ($203 मिलियन) है। इन अत्याधुनिक ड्रोन्स को सीधे भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में लगातार और सटीक इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रीकॉनिसेंस (ISR) कवरेज सुनिश्चित होगी।
हिंद महासागर में मजबूत होगी सुरक्षा और Maritime Domain Awareness (MDA)
MQ-9B SeaGuardian अपनी श्रेणी का सबसे उन्नत HALE अनमैन्ड प्लेटफॉर्म है। यह अत्याधुनिक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (EO/IR) सेंसर्स, मल्टी-मोड मैरीटाइम सर्फेस सर्च रडार और मिशन पेलोड से लैस है।
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लगातार निगरानी: यह ड्रोन 30 से अधिक घंटों तक लगातार उड़ान भरने में सक्षम है, जिससे विशाल समुद्री क्षेत्र में चीनी जहाजों, पनडुब्बियों और संदिग्ध गतिविधियों पर पल-पल की नजर रखी जा सकेगी।
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रणनीतिक बढ़त: इससे भारत की Maritime Domain Awareness (MDA) क्षमता में अभूतपूर्व सुधार होगा, जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में नौसेना को क्विक रिस्पॉन्स प्लानिंग में मदद मिलेगी।
बड़े 31 MQ-9B बेड़े के अधिग्रहण से पहले अंतरिम क्षमता
यह लीज समझौता भारत के उस बड़े रक्षा कार्यक्रम के पूरक (Complementary) के रूप में काम करेगा, जिसके तहत तीनों सेनाओं के लिए 31 स्थायी MQ-9B ड्रोन्स का अधिग्रहण प्रस्तावित है:
| बल (Force) | प्रस्तावित ड्रोन मॉडल | संख्या |
| भारतीय नौसेना (Indian Navy) | MQ-9B SeaGuardian | 15 |
| भारतीय सेना (Indian Army) | MQ-9B SkyGuardian | 08 |
| भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) | MQ-9B SkyGuardian | 08 |
स्थायी रूप से खरीदे जाने वाले ड्रोन्स की डिलीवरी प्रक्रिया शुरू होने तक यह लीज सौदा भारतीय नौसेना को बिना किसी रुकावट के उच्च स्तरीय निगरानी क्षमता (Operational Gap Cover) प्रदान करेगा।
नौसेना के पास पहले से मौजूद लीज्ड बेड़े में वृद्धि
भारतीय नौसेना पहले से ही 2020 से दो लीज्ड MQ-9-सीरीज SeaGuardian ड्रोन्स का सफलतापूर्वक संचालन कर रही है। अब दो नए प्लेटफॉर्म्स जुड़ने से लीज्ड सीगार्डियन बेड़े की क्षमता दोगुनी हो जाएगी।
यह अनमैन्ड प्लेटफॉर्म सैटेलाइट इमेजरी, पोत-आधारित सेंसर्स और manned मैरीटाइम गश्ती विमानों (जैसे P-8I Poseidon) के साथ एकीकृत (Network-Centric Warfare) होकर निगरानी का एक अचूक सुरक्षा चक्र तैयार करता है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1: भारत और अमेरिका के बीच लीज समझौते का कुल बजट और समय सीमा क्या है?
उत्तर: यह समझौता 30 महीने (2.5 साल) के लिए हुआ है और इसकी कुल अनुमानित लागत ₹1,943 करोड़ (लगभग $203 मिलियन) है।
Q2: MQ-9B SeaGuardian की मुख्य विशेषता क्या है?
उत्तर: यह एक High-Altitude Long-Endurance (HALE) अनमैन्ड एयरक्राफ्ट है, जो अत्यधिक ऊंचाई पर 30 से 40 घंटे तक लगातार उड़ान भरकर सतह और समुद्री जहाजों की निगरानी कर सकता है।
Q3: भारत कुल कितने MQ-9B ड्रोन्स खरीदने की योजना बना रहा है?
उत्तर: भारत तीनों सेनाओं के लिए कुल 31 MQ-9B ड्रोन्स (15 SeaGuardian और 16 SkyGuardian) अधिग्रहित करने की प्रक्रिया में है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध समाचार सामग्री और रक्षा अपडेट्स के आधार पर केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है।
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