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कन्नूर बम कांड: 15 साल बाद इंसाफ, CPM के 10 कार्यकर्ताओं को कड़ी सजा; मुख्य आरोपी को 25 साल जेल

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कन्नूर कोर्ट

तिरुवनंतपुरम | रविवार, 19 अप्रैल 2026

केरल के कन्नूर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ 2011 के चर्चित थिमिरी बम हमले के मामले में अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। तलिपरंबा के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) के 10 कार्यकर्ताओं को दोषी करार देते हुए लंबी जेल की सजा सुनाई है।

मुख्य आरोपी को ‘कड़ी सजा’, 25 साल तक रहेगा सलाखों के पीछे

न्यायाधीश प्रशांत के.एन. ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य आरोपी टीवी बीनू उर्फ उरुम्बन बीनू को सबसे कड़ी सजा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बीनू को विभिन्न धाराओं के तहत मिली सजाएं लगातार (Consecutively) चलेंगी, जिसका अर्थ है कि उसे कुल 25 साल जेल में बिताने होंगे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, बीनू ही वह व्यक्ति था जिसने जान लेने की नियत से RSS-BJP कार्यकर्ताओं से भरे वाहन पर सीधा बम फेंका था।

इन 9 अन्य दोषियों को मिली 10-10 साल की सजा

मुख्य आरोपी के अलावा, हमले की साजिश और हिंसा में शामिल अन्य 9 दोषियों को भी जेल की सजा सुनाई गई है। इनकी सजाएं एक साथ (Concurrently) चलेंगी, जिसके कारण इन्हें अधिकतम 10 साल कारावास में रहना होगा। दोषियों की सूची में पी.वी. बाबूराज भी शामिल है, जो अलाकोड पंचायत का सदस्य है। अन्य दोषियों के नाम इस प्रकार हैं:

  • एम.के. प्रदीपकुमार

  • पी.पी. सथ्यान

  • ई.वी. विनोद कुमार

  • विजयन

  • के.पी. सुरेश

  • टोबी

  • जनार्दनन के.वी.

  • शिवप्रकाश

क्या थी पूरी घटना? (दिनांक: 27 नवंबर 2011)

यह मामला करीब डेढ़ दशक पुराना है। 2011 में कन्नूर के थिमिरी कॉलेज के पास यह खूनी संघर्ष हुआ था।

  1. विवाद की जड़: क्षेत्र में RSS की नई शाखा (Shakha) खोलने को लेकर CPM और दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं के बीच तनाव चरम पर था। हमले से एक दिन पहले भी दोनों गुटों में तीखी झड़प हुई थी।

  2. कायरतापूर्ण हमला: घटना वाले दिन, लगभग 30 RSS-BJP कार्यकर्ता एक वाहन में सवार होकर जा रहे थे। इसी दौरान उन पर बमों से हमला किया गया।

  3. घायल: इस भीषण विस्फोट में वाहन में सवार 9 कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें लंबे समय तक उपचार कराना पड़ा था।

भारी जुर्माना और कोर्ट की टिप्पणी

अदालत ने दोषियों पर केवल जेल ही नहीं, बल्कि भारी जुर्माना भी लगाया है। प्रत्येक दोषी पर ₹2.6 लाख का जुर्माना लगाया गया है। लोक अभियोजक (Public Prosecutor) यू. रमेशन ने मीडिया को बताया कि अदालत ने माना है कि अभियोजन पक्ष दोषियों के खिलाफ ‘संदेह से परे’ सबूत पेश करने में सफल रहा है।

राजनीतिक हिंसा पर बड़ा प्रहार

कन्नूर लंबे समय से राजनीतिक प्रतिशोध और हिंसा का केंद्र रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सख्त फैसले भविष्य में होने वाली राजनीतिक झड़पों पर लगाम लगाने का काम करेंगे। 15 साल बाद आए इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि भले ही न्याय मिलने में समय लगे, लेकिन कानून के हाथ दोषियों तक पहुँच ही जाते हैं।

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