देवघर | रविवार, 19 अप्रैल 2026
भारतीय खेल जगत की ‘गोल्डन गर्ल’ और पूर्व विश्व नंबर-1 बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल रविवार को झारखंड के देवघर पहुंचीं। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन से संन्यास (Retirement) की घोषणा करने के बाद, साइना अपनी इस यात्रा के दौरान आध्यात्मिक रंग में रंगी नजर आईं। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर महादेव का आशीर्वाद लिया।
बाबा मंदिर में की विशेष पूजा-अर्चना
रविवार सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच साइना नेहवाल अपने पिता हरवीर सिंह नेहवाल के साथ मंदिर परिसर पहुंचीं। तीर्थ पुरोहितों ने उन्हें पारंपरिक मंत्रोच्चार के साथ संकल्प कराया, जिसके बाद साइना ने गर्भगृह में बाबा का जलार्पण किया। पूजा के बाद बाहर निकलते समय उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा:
“बाबा धाम आकर मन को असीम शांति मिली है। मैंने देश की सुख-समृद्धि और भारतीय खेलों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बाबा से प्रार्थना की है।”
संन्यास के बाद पहली देवघर यात्रा
गौरतलब है कि साइना नेहवाल ने जनवरी 2026 में घुटने की गंभीर चोट (Arthritis और Cartilage की समस्या) के कारण प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन से आधिकारिक तौर पर संन्यास ले लिया था। खेल के मैदान से दूर होने के बाद यह उनकी पहली बड़ी आध्यात्मिक यात्रा है। मंदिर प्रशासन की ओर से उन्हें अंगवस्त्र और बाबा का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
प्रशंसकों का उमड़ा सैलाब
जैसे ही साइना के मंदिर पहुंचने की खबर फैली, वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं और प्रशंसकों के बीच सेल्फी लेने की होड़ मच गई। साइना ने भी मुस्कुराहट के साथ प्रशंसकों का अभिवादन स्वीकार किया। स्थानीय खेल प्रेमियों के लिए यह एक बड़ा क्षण था, क्योंकि साइना भारत की पहली महिला बैडमिंटन खिलाड़ी हैं जिन्होंने ओलंपिक में पदक जीतकर इस खेल को घर-घर तक पहुँचाया।
साइना नेहवाल का गौरवशाली करियर
साइना की इस यात्रा ने उनके शानदार करियर की यादें ताजा कर दी हैं:
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ऐतिहासिक उपलब्धि: 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली पहली भारतीय शटलर।
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विश्व रैंकिंग: 2015 में दुनिया की नंबर-1 खिलाड़ी बनीं।
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प्रमुख खिताब: 24 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिताब, जिनमें 10 सुपर सीरीज टाइटल शामिल हैं।
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सम्मान: भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण, खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित।
निष्कर्ष:
साइना नेहवाल का देवघर आगमन न केवल उनकी निजी आस्था को दर्शाता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी अपनी जड़ों और आध्यात्मिकता से जुड़ाव कितना महत्वपूर्ण है।
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