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डॉ. केशव राव बलीराम हेडगेवार: क्रांतिकारी डॉक्टर जिन्होंने रखी RSS की नींव, जानें मनोज टाटा ने क्या कहा

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बांसी। शनिवार, 11 जुलाई 2026

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) खण्ड जखौरा के प्रारंभिक वर्ग के बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र को मुख्य वक्ता के रूप में सम्बोधित करते हुए झांसी विभाग के प्रचार प्रमुख मनोज टाटा ने शिक्षार्थियों के सामने संघ के संस्थापक डॉ. केशव राव बलीराम हेडगेवार के जीवन, उनके संघर्षों और राष्ट्र निर्माण के संकल्पों को रखा।

मनोज टाटा ने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने अपना पूरा जीवन बिना किसी पद और प्रचार के राष्ट्रकार्य में समर्पित कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप आज RSS दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन बनकर खड़ा है।

बचपन से ही कूट-कूट कर भरी थी देशभक्ति

डॉ. केशव राव बलीराम हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल 1889 को नागपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम बलीराम हेडगेवार और माता का नाम रेवती बाई था। बचपन में ही प्लेग की महामारी के कारण उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया, लेकिन इस भीषण संकट के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी।

वह बचपन से ही तेजस्वी और देशभक्त थे। विद्यालय और महाविद्यालय के दिनों में भी राष्ट्रवाद की अलख उनके भीतर जल रही थी। महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान “भारत माता की जय” का नारा लगाने के कारण उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा जेल भी जाना पड़ा था।

क्रांतिकारियों के संपर्क और कांग्रेस में भूमिका

चिकित्सा शिक्षा के लिए डॉ. हेडगेवार कलकत्ता (अब कोलकाता) गए, जहाँ उन्होंने नेशनल मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की। कलकत्ता में रहते हुए वे उस दौर की प्रसिद्ध क्रांतिकारी संस्था “अनुशीलन समिति” के संपर्क में आए और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

साल 1920 में नागपुर लौटने के बाद वे कांग्रेस में सक्रिय हुए और महात्मा गांधी के नेतृत्व वाले असहयोग आंदोलन में भाग लिया, जिसके कारण उन्हें एक साल की जेल काटनी पड़ी। युवाओं को राष्ट्रवाद से जोड़ने के लिए उन्होंने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर “सार्वजनिक गणेशोत्सव” का सफल आयोजन भी किया।

27 सितंबर 1925: RSS की स्थापना और मूल मंत्र

डॉ. हेडगेवार का मानना था कि केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही काफी नहीं है, बल्कि एक शक्तिशाली राष्ट्र के निर्माण के लिए हिंदू समाज का संगठित होना जरूरी है। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने 27 सितंबर 1925 को विजयदशमी के पावन पर्व पर नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना की।

उन्होंने स्वयंसेवकों के लिए एकता, अनुशासन और सेवा को जीवन का मूल मंत्र बनाया। समाज में फैली कुरीतियों और जात-पात से ऊपर उठकर उन्होंने “समाज समरसता” पर सबसे ज्यादा जोर दिया। उन्होंने संघ को हमेशा राजनीति से दूर रखकर एक विशुद्ध सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन के रूप में खड़ा किया। 21 जून 1940 को इस महान राष्ट्रभक्त का निधन हो गया, लेकिन मात्र 15 वर्षों के उनके अथक प्रयास ने संघ की नींव को इतना मजबूत कर दिया कि आज यह वटवृक्ष बन चुका है।

इस बौद्धिक सत्र के अवसर पर वर्ग कार्यवाह गोपाल सोनी, खण्ड प्रचारक शिवेन्द्र, सहखण्डकार्यवाह मनोज कुमार, रवी कुमार, ध्रुव, आदित्य, रमाकांत गोस्वामी, सुरेन्द्र पस्तोर, भरत, हरिमोहन गोस्वामी, और शैलेन्द्र पुरोहित शैलू सहित बड़ी संख्या में शिक्षक व शिक्षार्थी उपस्थित रहे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक कौन थे?

उत्तर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव राव बलीराम हेडगेवार थे।

प्रश्न 2: RSS की स्थापना कब और कहाँ हुई थी?

उत्तर: RSS की स्थापना 27 सितंबर 1925 को विजयदशमी के दिन नागपुर, महाराष्ट्र में हुई थी।

प्रश्न 3: डॉ. हेडगेवार ने डॉक्टरी की पढ़ाई कहाँ से की थी?

उत्तर: उन्होंने कलकत्ता (कोलकाता) के नेशनल मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरी की पढ़ाई की थी और वे वहां ‘अनुशीलन समिति’ नामक क्रांतिकारी संगठन से जुड़े थे।

Disclaimer (अस्वीकरण): यह लेख बांसी (जखौरा) में आयोजित संघ के प्रारंभिक वर्ग में मुख्य वक्ता द्वारा दिए गए वक्तव्य और उपलब्ध सामाजिक विवरणों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सूचनात्मक जानकारी प्रदान करना है।

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