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मंदिर के सोने पर सरकारी कब्जे की अफवाहों का सच: वित्त मंत्रालय का बड़ा स्पष्टीकरण

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भारतीय मंदिर का स्वर्ण गुंबद और वित्त मंत्रालय का लोगो - अफवाहों का खंडन दर्शाता हुआ प्रतीकात्मक चित्र।

नई दिल्ली । मंगलवार, 19 मई 2026 

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और विभिन्न चर्चाओं में एक खबर तेजी से प्रसारित हो रही है कि सरकार देश के प्रसिद्ध मंदिरों और धार्मिक संस्थानों के पास रखे सोने को अपने नियंत्रण में लेने या उसका ‘मुद्रीकरण’ (Monetization) करने की योजना बना रही है। इस खबर के सामने आते ही श्रद्धालुओं और आम जनता के बीच चिंता और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी।

इस संवेदनशील मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर इन सभी अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है।

अफवाहों को बताया पूरी तरह ‘गलत और निराधार’

वित्त मंत्रालय ने अपने स्पष्टीकरण में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि देश भर के मंदिर न्यासों (Temple Trusts) या किसी भी धार्मिक संस्थान के पास रखे सोने के लिए किसी नई मुद्रीकरण योजना को शुरू करने का कोई विचार नहीं है। मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर चल रही ये अफवाहें पूरी तरह से झूठी, भ्रामक और निराधार हैं। सरकार के पास ऐसी कोई भी योजना विचाराधीन नहीं है।”

‘रणनीतिक स्वर्ण भंडार’ वाले दावे का भी खंडन

इतना ही नहीं, इंटरनेट पर कुछ ऐसे अजीबोगरीब दावे भी किए जा रहे थे कि मंदिरों के गुंबदों, दरवाजों, मूर्तियों या अन्य ढांचों पर चढ़ी सोने की परतों को भी ‘भारत के रणनीतिक स्वर्ण भंडार’ (Strategic Gold Reserves) का हिस्सा माना जाएगा। वित्त मंत्रालय ने इस दावे को भी सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस तरह की बातें केवल जनता को गुमराह करने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं और इनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।

आधिकारिक संचार पर ही करें भरोसा

सरकार ने देश के नागरिकों से भावुक या संवेदनशील धार्मिक मुद्दों पर किसी भी असत्यापित जानकारी को आगे न फैलाने (शेयर न करने) का आग्रह किया है। ऐसी झूठी खबरें समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करती हैं। सरकार ने सलाह दी है कि नीतिगत निर्णयों या सरकारी योजनाओं से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल अधिकृत माध्यमों जैसे:

  • आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियां (PIB Releases)

  • सरकारी वेबसाइटें

  • सत्यापित सोशल मीडिया हैंडल्स

इन्हीं आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी को ही सही और विश्वसनीय माना जाना चाहिए।

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