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पश्चिम बंगाल में ‘चुनावी हिंसा’ पर बड़ी कार्रवाई: TMC नेता अब्दुल कादिर हक गिरफ्तार, सैकड़ों पुराने मामले फिर खुले

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शुभेंदु अधिकारी द्वारा कानून-व्यवस्था और पश्चिम बंगाल 2021 चुनावी हिंसा मामलों की समीक्षा बैठक।

कोलकाता । मंगलवार, 19 मई 2026

पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा के पुराने मामलों को लेकर प्रशासन ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। राज्य पुलिस ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता अब्दुल कादिर हक को चुनाव के बाद हुई मारपीट और गंभीर हिंसा के आरोपों के तहत गिरफ्तार कर लिया है।

यह कार्रवाई राज्य में राजनीतिक सरगर्मियों को बढ़ाने वाली है, क्योंकि इसे मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी के उस हालिया और कड़े निर्देश से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने राज्य भर की पुलिस को कानून व्यवस्था चुस्त करने के आदेश दिए थे।

मुख्यमंत्री का कड़ा निर्देश और BNS का प्रयोग

9 मई को पदभार संभालने के बाद से ही मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने राज्य की कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया था। उन्होंने पुलिस प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि 2021 के चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े सभी मामलों, विशेषकर हत्या और जानलेवा हमले के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के कड़े प्रावधानों को लागू किया जाए।

अब्दुल कादिर हक की गिरफ्तारी इसी नए प्रशासनिक रुख की पहली बड़ी कड़ी मानी जा रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कुछ और रसूखदार नाम भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

आंकड़ों में नई कार्रवाई: 458 नई जांचें शुरू

राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों से प्राप्त नवीनतम जानकारी के अनुसार, चुनावी हिंसा के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए बड़े पैमाने पर समीक्षा अभियान चलाया जा रहा है:

  • नई जांचें (New Investigations): राज्य भर में अब तक कुल 458 नई जांचें शुरू की जा चुकी हैं।

  • नई एफआईआर (New FIRs): विभिन्न जिलों में 181 नई FIR दर्ज की गई हैं।

  • बंद मामले फिर खुले: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस ने ऐसे 59 मामलों को फिर से खोल (Re-open) दिया है, जिनमें पहले ‘अंतिम रिपोर्ट’ (Final Report) जमा करके फाइलों को बंद कर दिया गया था।

प्रशासन का आश्वासन: “हम हर एक मामले की नए सिरे से निष्पक्ष समीक्षा कर रहे हैं ताकि किसी भी संभावित पीड़ित के साथ अन्याय न हो। कानून अपना काम पूरी निष्पक्षता से करेगा।”

💡 संदर्भ (Context)

इस पूरे घटनाक्रम को सही परिप्रेक्ष्य में समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक तथ्यों पर ध्यान देना आवश्यक है:

  1. संवैधानिक और राजनीतिक संदर्भ: वर्तमान में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर जो प्रशासनिक बदलाव हुए हैं, उनके तहत कानून-व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद पुलिस पुराने बंद मामलों पर भी तेजी से एक्शन ले रही है।

  2. सबूतों के बिना भी शिकायत की छूट: आमतौर पर पुलिस बिना ठोस शुरुआती सबूतों के मामला दर्ज करने से कतराती है। लेकिन इस बार प्रशासन ने पीड़ितों और उनके परिवारों से विशेष आग्रह किया है कि यदि उनके पास तत्काल कोई ठोस सबूत न भी हो, तो भी वे निडर होकर आगे आएं और अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

जबरन वसूली और जमीन हड़पने के मामलों की भी जांच

पुलिस की यह कार्रवाई केवल 2021 की चुनावी हिंसा तक ही सीमित नहीं है। राज्य पुलिस विभिन्न जिलों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई स्थानीय और जिला स्तर के नेताओं के खिलाफ चल रही जांचों को भी तेज कर चुकी है। इन नेताओं पर जबरन वसूली (Extortion), जमीनी विवाद और अवैध रूप से जमीन हड़पने के गंभीर आरोप हैं। विभिन्न जिलों की पुलिस साक्ष्यों के आधार पर लगातार छापेमारी और पूछताछ कर रही है।

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