नई दिल्ली । रविवार, 19 जुलाई 2026
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और हालिया हवाई हमलों के बीच, ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। इन आशंकाओं पर विराम लगाते हुए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित मीडिया ब्रीफिंग में पुष्टि की है कि भारत द्वारा संचालित शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल (Shahid Beheshti Terminal) को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है और वहां सभी परिचालन सामान्य रूप से जारी हैं।
अमेरिकी हवाई हमले के बाद सुरक्षा पर बड़ा स्पष्टीकरण
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान अमेरिकी सेना (CENTCOM) द्वारा चाबहार के पड़ोसी ‘शाहिद कलंतरी पोर्ट’ पर स्थित एक निगरानी टॉवर को निशाना बनाने की खबरें आई थीं। इसके बाद सोशल मीडिया पर चाबहार पोर्ट को लेकर अफवाहें फैलने लगीं।
भारत के विदेश मंत्रालय ने इन खबरों पर सीधा जवाब देते हुए कहा:
“हमने चाबहार बंदरगाह पर हमले से जुड़ी रिपोर्ट देखी हैं, लेकिन हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि भारत द्वारा संचालित शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को कोई नुकसान नहीं हुआ है और वहां गतिविधियां सुचारू रूप से चल रही हैं।”
इसके साथ ही भारत ने वैश्विक मंच पर अपना पुराना रुख दोहराते हुए कहा कि किसी भी संघर्ष की स्थिति में नागरिक और व्यापारिक बुनियादी ढांचे (Civilian Infrastructure) को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
अमेरिकी प्रतिबंध छूट (Sanctions Waiver) पर बातचीत जारी
चाबहार परियोजना के भविष्य को लेकर एक और बड़ी चुनौती अमेरिकी प्रतिबंधों की है। विदेश मंत्रालय ने स्वीकार किया कि इस परियोजना के लिए अमेरिका द्वारा दी गई प्रतिबंध छूट की अवधि (जो अप्रैल 2026 तक थी) अब समाप्त हो चुकी है।
हालांकि, भारत ने इस प्रोजेक्ट से हाथ पीछे नहीं खींचे हैं। भारत अपने रणनीतिक और व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका और अन्य संबंधित पक्षों (Stakeholders) के साथ लगातार राजनयिक बातचीत कर रहा है। भारत कूटनीतिक स्तर पर ऐसा रास्ता निकालने का प्रयास कर रहा है जिससे वैश्विक प्रतिबंधों का असर भारत के व्यापार पर न पड़े।
भारत के लिए क्यों लाइफलाइन है चाबहार?
चाबहार बंदरगाह केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी (Regional Connectivity) का सबसे मजबूत स्तंभ है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
-
पाकिस्तान को बाईपास करना: यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान की भूमि सीमा का उपयोग किए बिना सीधे अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों (Central Asia) तक सुरक्षित व्यापारिक मार्ग प्रदान करता है।
-
INSTC का मुख्य हिस्सा: चाबहार बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (International North-South Transport Corridor – INSTC) को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कड़ी है, जो भारत को रूस और यूरोप से जोड़ेगा।
-
ग्वादर पोर्ट का मुकाबला: भौगोलिक दृष्टिकोण से यह पाकिस्तान में चीन द्वारा विकसित किए जा रहे ग्वादर पोर्ट से महज 140 किलोमीटर की दूरी पर है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
क्षेत्रीय हालातों और नागरिकों की सुरक्षा पर पैनी नजर
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत सरकार पश्चिम एशिया के बदलते समीकरणों पर चौबीसों घंटे नजर रख रही है। क्षेत्र में मौजूद भारतीय प्रवासियों, नाविकों (Seafarers) और वाणिज्यिक दूतावासों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्थिति बिगड़ने पर आपातकालीन योजनाओं के तहत हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
निष्कर्ष
तमाम भू-राजनीतिक दबावों और अमेरिकी प्रतिबंधों की समाप्ति के बावजूद भारत ने साफ कर दिया है कि वह चाबहार परियोजना को लेकर प्रतिबद्ध है। शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल का सुरक्षित होना और परिचालन जारी रहना भारतीय विदेश नीति की एक बड़ी कामयाबी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: क्या अमेरिकी हमले में भारतीय टर्मिनल को नुकसान हुआ है?
उत्तर: नहीं, विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत द्वारा संचालित शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल पूरी तरह सुरक्षित है और वहां कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है। अमेरिकी हमला पड़ोसी हिस्से (शाहिद कलंतरी पोर्ट) पर हुआ था।
प्रश्न 2: अमेरिकी प्रतिबंध छूट (Sanctions Waiver) खत्म होने का क्या मतलब है?
उत्तर: अमेरिका ने भारत को ईरान के साथ इस बंदरगाह पर व्यापार करने के लिए जो विशेष छूट दी थी, उसकी अवधि अप्रैल 2026 में समाप्त हो गई है। अब भारत इस परियोजना को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ाने के लिए नए कूटनीतिक विकल्पों पर अमेरिका से बातचीत कर रहा है।
प्रश्न 3: चाबहार बंदरगाह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह भारत को पाकिस्तान से गुजरे बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया के बाजारों तक सीधी पहुंच देता है। साथ ही यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के जवाब में भारत की एक रणनीतिक स्थिति मजबूत करता है।
Disclaimer (अस्वीकरण): यह लेख विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयानों और हालिया वैश्विक मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ी रणनीतिक स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।
Matribhumisamachar


