नई दिल्ली. ईरान में पिछले तीन हफ्तों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने अब एक भयानक गृहयुद्ध का रूप ले लिया है। आर्थिक बदहाली और प्रशासनिक सख्ती के खिलाफ शुरू हुआ यह विद्रोह अब पूरे देश में फैल चुका है। इस बीच, वहां फंसे लगभग 12,000 भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए भारत सरकार ने ऐतिहासिक ‘ऑपरेशन स्वदेश’ (Operation Swadesh) का आगाज़ कर दिया है।
ईरान में खूनी संघर्ष: अब तक की स्थिति
ईरान में इंटरनेट और फोन सेवाएं पिछले 10 दिनों से लगभग पूरी तरह ठप हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे एमनेस्टी और संडे टाइम्स) दिल दहला देने वाले आंकड़े पेश कर रही हैं:
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भारी हताहत: रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 16,500 से अधिक लोगों की मौत होने की आशंका है, जबकि 3 लाख से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं।
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सैन्य घेराबंदी: तेहरान सहित कई प्रमुख शहर सैन्य छावनी में तब्दील हो चुके हैं। सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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खामेनेई का स्वीकारोक्ति: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार माना है कि संघर्ष में “हजारों लोग” मारे गए हैं, हालांकि उन्होंने इसका दोष बाहरी ताकतों पर मढ़ा है।
‘ऑपरेशन स्वदेश’: भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने संकट की गंभीरता को देखते हुए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू मिशन शुरू किया है।
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पहली उड़ान: शुक्रवार (16 जनवरी) को ‘ऑपरेशन स्वदेश’ के तहत पहली विशेष कमर्शियल फ्लाइट तेहरान से दिल्ली पहुँची। इसमें बड़ी संख्या में मेडिकल छात्र और तीर्थयात्री शामिल थे।
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छात्रों की सुरक्षा: ईरान में लगभग 3,000 भारतीय मेडिकल छात्र हैं। जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) के अनुसार, अधिकांश छात्रों का रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है और उन्हें सुरक्षित ठिकानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
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24/7 हेल्पलाइन: तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। जिन इलाकों में इंटरनेट बंद है, वहां भारतीयों के परिजनों को भारत से ही पंजीकरण कराने की सुविधा दी गई है।
भारत पर आर्थिक असर
ईरान संकट का सीधा असर भारत के व्यापार पर भी पड़ रहा है:
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व्यापार घाटा: पुरानी दिल्ली के थोक बाजारों (जैसे तिलक बाजार और खारी बावली) का ईरान के साथ लगभग 4,000 करोड़ रुपये का कारोबार ठप हो गया है। विशेषकर सूखे मेवे (पिस्ता) और रसायनों के आयात-निर्यात पर बुरा असर पड़ा है।
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तेल की कीमतें: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता की संभावना बढ़ गई है।
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