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बांदा पॉक्सो कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मासूमों के गुनहगार JE रामभवन और पत्नी को मिली फांसी की सजा

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CBI द्वारा गिरफ्तार आरोपी रामभवन और उसकी पत्नी का चित्र

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के बांदा की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने शुक्रवार को एक ऐसा फैसला सुनाया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। कोर्ट ने चित्रकूट में तैनात रहे निलंबित जूनियर इंजीनियर (JE) रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को मासूम बच्चों के यौन शोषण और उनकी अश्लील वीडियो बनाकर इंटरनेट पर बेचने के जुर्म में मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है।

10 साल तक चलता रहा मासूमियत का कत्ल

चित्रकूट के सिंचाई विभाग में कार्यरत रामभवन पिछले 10 वर्षों से बच्चों को अपनी हवस का शिकार बना रहा था। वह न केवल बच्चों का यौन शोषण करता था, बल्कि उनके अश्लील वीडियो और फोटो बनाकर डार्क वेब और इंटरनेट के माध्यम से दुनिया भर में बेचता था। जांच में सामने आया कि उसने 50 से अधिक बच्चों को अपना निशाना बनाया था, जिनमें से 34 बच्चों के साथ दरिंदगी की पुष्टि हुई है।

CBI की छापेमारी और बरामदगी

इस घिनौने अपराध का पर्दाफाश 16 नवंबर 2020 को हुआ, जब सीबीआई (CBI) की विशेष यूनिट ने बांदा और चित्रकूट में छापेमारी कर रामभवन को गिरफ्तार किया। आरोपी के पास से बरामद साक्ष्य देखकर जांच अधिकारी भी दंग रह गए थे:

  • 779 बच्चों की अश्लील तस्वीरें एक ही पेन ड्राइव में मिलीं।

  • 8 लाख रुपये नकद, लैपटॉप, वेब कैमरा और कई मेमोरी कार्ड बरामद हुए।

  • बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और सेक्स टॉयज भी जब्त किए गए।

पत्नी भी थी जुर्म में बराबर की भागीदार

अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि रामभवन की पत्नी दुर्गावती न केवल इस अपराध के बारे में जानती थी, बल्कि वह बच्चों को फंसाने और इस काले कारोबार में अपने पति की पूरी मदद करती थी। इसी आधार पर कोर्ट ने उसे भी ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) मामले की श्रेणी में रखते हुए फांसी की सजा सुनाई।

पुराना अपराधी था रामभवन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामभवन का आपराधिक इतिहास पुराना है। साल 2012 में कर्वी क्षेत्र की एक किशोरी की आत्महत्या के मामले में भी उसका नाम उछला था। उस समय परिजनों ने प्रताड़ना के आरोप लगाए थे, लेकिन रसूख और साक्ष्यों के अभाव में वह बच निकला था। हालांकि, 2020 की गिरफ्तारी के बाद उसके पुराने पापों का घड़ा भर गया।

कोर्ट की टिप्पणी: “ऐसे अपराधी समाज के लिए कलंक हैं। मासूम बच्चों के बचपन को बर्बाद करने वाले इन दोषियों के लिए मौत की सजा ही न्यायोचित है।”

matribhumisamachar.com

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