वॉशिंगटन डी.सी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार युद्ध (Global Trade War) की आग को और तेज करते हुए सभी विदेशी आयातों पर लगने वाले ‘ग्लोबल टैरिफ’ को 10% से बढ़ाकर 15% करने की ऐतिहासिक घोषणा की है। यह फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप प्रशासन के पिछले टैरिफ आदेशों को ‘अवैध’ घोषित करने के मात्र 24 घंटे के भीतर लिया गया है।
कानूनी पेंच: नया रास्ता, नया प्रहार
सुप्रीम कोर्ट ने कल ही ट्रंप के व्यापक टैरिफ अधिकारों पर रोक लगाई थी, जिसे राष्ट्रपति ने “राष्ट्र-विरोधी” करार दिया। कोर्ट के फैसले को दरकिनार करने के लिए व्हाइट हाउस ने अब ‘Trade Act of 1974’ की धारा 122 (Section 122) का सहारा लिया है।
धारा 122 क्या है?
यह राष्ट्रपति को विशेष अधिकार देती है कि वे अमेरिका के बढ़ते ‘व्यापार घाटे’ (Trade Deficit) को नियंत्रित करने के लिए अधिकतम 150 दिनों तक 15% तक का आपातकालीन आयात शुल्क लगा सकते हैं।
प्रमुख घोषणाएं और समयसीमा
व्हाइट हाउस द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, नए नियम निम्नलिखित रूप में प्रभावी होंगे:
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प्रभावी तिथि: यह नया शुल्क 24 फरवरी 2026 को रात 12:01 (EST) से लागू हो जाएगा।
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ब्लैंकेट ड्यूटी: यह एक “एकतरफा शुल्क” होगा, जो लगभग सभी देशों से आने वाले सामानों पर लागू होगा।
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पड़ोसी देशों को राहत: मेक्सिको और कनाडा को उनके मुक्त व्यापार समझौतों (USMCA) के कारण आंशिक छूट मिल सकती है, हालांकि इसकी पुष्टि अभी बाकी है।
वैश्विक बाजार में खलबली
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि यह कदम “घरेलू मैन्युफैक्चरिंग” को पुनर्जीवित करने और डॉलर की मजबूती के लिए आवश्यक है। हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि:
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महंगाई में वृद्धि: अमेरिका में आयातित सामान महंगे होने से आम जनता पर बोझ बढ़ेगा।
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सप्लाई चेन संकट: अचानक लिए गए इस फैसले से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) चरमरा सकती है।
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जवाबी कार्रवाई: चीन, यूरोपीय संघ और भारत जैसे देश जवाबी टैरिफ लगा सकते हैं, जिससे पूर्ण रूप से वैश्विक व्यापार युद्ध छिड़ सकता है।
अगले 150 दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत संवेदनशील होंगे। यदि इस अवधि में ट्रंप प्रशासन कांग्रेस (संसद) से स्थायी मंजूरी लेने में विफल रहता है, तो यह टैरिफ स्वतः समाप्त हो जाएंगे। लेकिन तब तक, दुनिया के सबसे बड़े बाजार “अमेरिका” में प्रवेश करना हर देश के लिए 15% महंगा हो चुका होगा।
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