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संसद मानसून सत्र: दूसरे दिन भी विपक्ष का भारी हंगामा, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित

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नई दिल्ली | मंगलवार, 21 जुलाई 2026

संसद के मानसून सत्र का आगाज काफी गहमागहमी भरा रहा है। सत्र के दूसरे दिन भी संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—में विपक्षी दलों का जोरदार विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग को लेकर अड़े विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी और अंततः दोनों सदनों को पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा।

लोकसभा में प्रश्नकाल शुरू होते ही नारेबाजी

लोकसभा की कार्यवाही सुबह जैसे ही प्रश्नकाल के साथ शुरू हुई, विपक्षी सांसद अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करने लगे। सदस्यों ने तख्तियां लेकर और वेल में आकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

स्पीकर और पीठ द्वारा सदस्यों को अपनी सीटों पर जाने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की गई, लेकिन गतिरोध खत्म नहीं हुआ। लगातार बढ़ते हंगामे को देखते हुए पहले सदन की कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित किया गया। जब दोबारा बैठक शुरू हुई, तब भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया और अंततः पीठासीन अधिकारी ने कार्यवाही को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया।

राज्यसभा में भी नहीं चला सदन, सभापति की अपील बेअसर

उधर उच्च सदन यानी राज्यसभा में भी स्थिति कुछ अलग नहीं रही। विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर तत्काल चर्चा कराने के लिए नियम 267 के तहत नोटिस दिए और नारेबाजी शुरू कर दी।

सभापति ने सदस्यों से शांति बनाए रखने और सदन के काम-काज को आगे बढ़ाने की अपील की, लेकिन विपक्षी सदस्य अपनी मांग पर अड़े रहे। बार-बार के व्यवधान और गतिरोध के चलते राज्यसभा की कार्यवाही भी बार-बार बाधित हुई और आखिर में इसे भी पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा।

महत्वपूर्ण विधायी कामकाज प्रभावित, सरकार और विपक्ष में तनातनी

लगातार दूसरे दिन संसद में काम-काज ठप रहने से सरकार के विधायी एजेंडे पर बुरा असर पड़ा है।

  • सरकार का रुख: सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष से अपील की कि वे सदन को चलने दें और विधायी कार्यों में सहयोग करें। सरकार का कहना है कि वे नियमानुसार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार हैं।

  • विपक्ष की मांग: विपक्ष का स्पष्ट कहना है कि देश के महत्वपूर्ण और तात्कालिक मुद्दों पर तुरंत चर्चा कराई जाए, जिसके बाद ही सदन को सुचारु रूप से चलने दिया जाएगा।

सदन में इस गतिरोध के चलते कई महत्वपूर्ण विधेयकों और सरकारी प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी।

आगे क्या? अगली बैठक पर टिकी निगाहें

लगातार हो रहे हंगामे के बाद अब सभी की निगाहें संसद की अगली बैठक पर टिकी हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार और विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत के जरिए कोई बीच का रास्ता निकल सकता है, ताकि संसद में सामान्य स्थिति बहाल हो सके और जनहित के लंबित विषयों पर सार्थक चर्चा हो पाए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. संसद के मानसून सत्र में हंगामा क्यों हो रहा है?

उत्तर: विपक्षी दल विभिन्न राष्ट्रीय व जनहित के मुद्दों पर संसद में तत्काल चर्चा कराने की मांग कर रहे हैं, जिसे लेकर सदन में नारेबाजी और गतिरोध बना हुआ है।

Q2. क्या संसद के दोनों सदन स्थगित कर दिए गए हैं?

उत्तर: जी हाँ, हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

Q3. कार्यवाही बाधित होने से क्या नुकसान होता है?

उत्तर: संसद स्थगित होने से जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों (Bills), प्रश्नों और सरकारी कार्यकाज पर चर्चा नहीं हो पाती है।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट संसद के चालू सत्र के दौरान हुई कार्यवाही के घटनाक्रम पर आधारित है। संसद की स्थिति और नए घटनाक्रमों के अनुसार जानकारी में बदलाव हो सकता है।

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