लखनऊ. समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने हाल ही में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ गठबंधन की संभावनाओं को पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया है। 22 जनवरी 2026 को जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि के अवसर पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा को किसी भी ‘बाहरी’ सहयोग की आवश्यकता नहीं है।
यहाँ इस बयान का विस्तृत राजनीतिक विश्लेषण और रिपोर्ट दी गई है:
1. शिवपाल यादव का मुख्य बयान
शिवपाल यादव ने दो टूक शब्दों में कहा:
“हमें AIMIM की कोई जरूरत नहीं है। समाजवादी पार्टी अपने दम पर 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ने और सरकार बनाने में पूरी तरह सक्षम है। हमारी ताकत जनता, किसान और नौजवान हैं।”
यह बयान उन अटकलों के बाद आया है जिसमें सपा के कुछ सांसदों ने भाजपा को हराने के लिए ‘समान विचारधारा’ वाले दलों के साथ आने के संकेत दिए थे। शिवपाल ने इन चर्चाओं पर पूर्णविराम लगा दिया है।
2. विश्लेषण: क्यों सपा कर रही है AIMIM से किनारा?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, शिवपाल यादव का यह कड़ा रुख कई रणनीतिक कारणों से प्रेरित है:
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‘वोट कटवा’ की छवि: सपा लंबे समय से AIMIM को भाजपा की ‘बी-टीम’ या ‘वोट कटवा’ पार्टी मानती रही है। सपा का मानना है कि ओवैसी के साथ आने से मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है, जिससे अंततः भाजपा को फायदा होगा।
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मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण पर भरोसा: लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों के बाद सपा को विश्वास है कि मुस्लिम मतदाता अब मजबूती से उनके साथ खड़ा है और उसे किसी अन्य मुस्लिम-केंद्रित पार्टी के बैसाखी की जरूरत नहीं है।
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PDA रणनीति: अखिलेश यादव की PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के तहत पार्टी खुद को एक समावेशी दल के रूप में पेश कर रही है। AIMIM जैसी धार्मिक आधार वाली पार्टी के साथ जुड़ने से सपा के ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘सर्वजातीय’ नैरेटिव को धक्का लग सकता है।
3. विपक्षी एकता और 2027 की तैयारी
शिवपाल यादव का यह रुख विपक्षी एकता (INDIA Alliance) के भविष्य पर भी सवाल उठाता है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर यह सपा के आत्मविश्वास को दर्शाता है।
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उनका दावा है कि सपा की जड़ें गाँवों और जमीनी स्तर पर इतनी मजबूत हो चुकी हैं कि वे अकेले ही सत्ता परिवर्तन कर सकते हैं।
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उन्होंने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संकेत दिया है कि वे गठबंधन के भरोसे रहने के बजाय जमीन पर अपनी ताकत बढ़ाएं।
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