इस्लामाबाद. पाकिस्तान में एचआईवी (HIV) संक्रमण की स्थिति एक भयावह मोड़ ले चुकी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाओं पर राष्ट्रीय असेंबली की स्थायी समिति (National Assembly Standing Committee on National Health Services) ने मंत्रालय द्वारा पेश की गई रिपोर्ट को “अपूर्ण और भ्रामक” बताते हुए खारिज कर दिया है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि आंकड़ों में सुधार नहीं किया गया, तो पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर शर्मिंदगी और अंतरराष्ट्रीय सहायता में कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
📉 आंकड़ों की बाजीगरी: 81 हजार या 3.5 लाख?
समिति के अध्यक्ष महेश कुमार मलानी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह खुलासा हुआ कि संघीय सरकार और प्रांतीय आंकड़ों के बीच जमीन-आसमान का अंतर है।
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सरकारी दावा: स्वास्थ्य मंत्रालय ने केवल 81,000 पंजीकृत मरीजों की रिपोर्ट दी।
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हकीकत: अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं (WHO और UNAIDS) और स्वतंत्र विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान में HIV संक्रमितों की संख्या 3,50,000 के पार पहुंच सकती है।
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इलाज का संकट: चौंकाने वाली बात यह है कि कुल संभावित संक्रमितों में से केवल 10% (लगभग 34,000) मरीज ही एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) ले रहे हैं।
📍 प्रांतों की स्थिति और डेटा का ‘ब्लैक होल’
संसदीय पैनल ने पाया कि मंत्रालय की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण डेटा गायब थे:
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बलूचिस्तान: इस प्रांत का अद्यतन डेटा रिपोर्ट से पूरी तरह नदारद था।
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खैबर पख्तूनख्वा (KP): प्रांतीय आंकड़ों के अनुसार, केवल 2025 के दौरान यहाँ 40,000 नए मरीज दर्ज किए गए, जो संघीय सरकार के कुल आंकड़ों को संदिग्ध बनाता है।
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इस्लामाबाद: यहाँ भी नियामक संस्थाओं द्वारा पुराना डेटा जमा करने पर समिति ने कड़ी नाराजगी जताई।
💉 संक्रमण फैलने के ‘सुपर स्प्रेडर’ कारण
समिति ने रेखांकित किया कि पाकिस्तान में HIV केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक विफलता बन गई है। संक्रमण की 200% वृद्धि के पीछे मुख्य कारण हैं:
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असुरक्षित इंजेक्शन: निजी क्लीनिकों में एक ही सिरिंज का बार-बार उपयोग।
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अनावश्यक इलाज: ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-मोटे रोगों के लिए भी ड्रिप और इंजेक्शन का अत्यधिक उपयोग।
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अनियंत्रित स्वास्थ्य केंद्र: बिना लाइसेंस के चल रहे हजारों क्लीनिक और लैब।
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नवजात शिशुओं में खतरा: सिंध और अन्य क्षेत्रों में HIV पॉजिटिव बच्चों के जन्म की खबरें भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।
⚠️ अंतरराष्ट्रीय साख और आर्थिक बोझ पर खतरा
समिति के सदस्यों, जिनमें डॉ. शाज़िया सोबिया सोमरो और अन्य शामिल थे, ने चेतावनी दी कि गलत डेटा WHO और UNAIDS जैसी संस्थाओं को भेजा गया तो:
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पाकिस्तान की वैश्विक रैंकिंग गिरेगी।
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ग्लोबल फंड और अंतरराष्ट्रीय दवाओं की आपूर्ति रुक सकती है।
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इलाज का खर्च: वर्तमान में प्रति मरीज सालाना $300 से $500 का खर्च आ रहा है, जो डेटा के अभाव में अनियंत्रित हो सकता है।
✅ भविष्य की रणनीति: मंत्रालय को सख्त निर्देश
स्थायी समिति ने स्वास्थ्य मंत्रालय और पाकिस्तान मेडिकल एंड डेंटल काउंसिल (PMDC) को निम्नलिखित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं:
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ग्राउंड सर्वे: कागजी आंकड़ों के बजाय धरातल पर जाकर सर्वे किया जाए।
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जिला स्तर पर केंद्र: संघीय स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने हर जिले में कम से कम एक स्क्रीनिंग और उपचार केंद्र खोलने का निर्देश दिया है।
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स्वतंत्र समीक्षा: अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को रिपोर्ट भेजने से पहले डेटा की थर्ड-पार्टी समीक्षा अनिवार्य की जाए।
निष्कर्ष: पाकिस्तान इस समय HIV के मामले में “टिक-टिक करते बम” पर बैठा है। यदि 90% संक्रमित लोग सिस्टम की पकड़ से बाहर रहे, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अपूर्णीय क्षति होगी।
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