मुंबई. देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (MSIL) को हाल ही में आयकर विभाग (Income Tax Department) से ₹1183 करोड़ (लगभग ₹1182.5 करोड़) का टैक्स नोटिस मिला है। यह नोटिस वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए जारी किया गया है।
1. मुख्य समाचार: नोटिस का विवरण
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राशि: ₹1182.5 करोड़ (ब्याज सहित)।
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अवधि: वित्तीय वर्ष 2021-22 (AY 2022-23)।
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कारण: आयकर प्राधिकरण ने कंपनी द्वारा फाइल किए गए रिटर्न में कुछ कटौती (Disallowances) और आय में वृद्धि (Additions) का प्रस्ताव दिया है।
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कंपनी का रुख: मारुति सुजुकी ने स्पष्ट किया है कि वे इस नोटिस के खिलाफ आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) में अपील दायर करेंगे।
2. शेयर बाजार पर तात्कालिक असर
नोटिस की खबर सार्वजनिक होते ही शेयर बाजार में निवेशकों के बीच थोड़ी हलचल देखी गई:
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शेयरों में गिरावट: खबर आने के बाद मारुति सुजुकी का शेयर लगभग 1.87% तक टूटकर ₹15,469.60 (जनवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार) के स्तर पर बंद हुआ।
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सेक्टोरल इम्पैक्ट: इसका असर निफ्टी ऑटो इंडेक्स पर भी मामूली रूप से देखा गया, क्योंकि मारुति इस इंडेक्स का एक प्रमुख हिस्सा है।
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निवेशक धारणा: हालांकि भारी गिरावट नहीं हुई, लेकिन अल्पकालिक निवेशकों ने सुरक्षा के लिहाज से थोड़ी मुनाफावसूली (Profit Booking) की।
3. कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य पर प्रभाव
मारुति सुजुकी ने आधिकारिक बयान जारी कर निवेशकों को आश्वस्त किया है:
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संचालन पर कोई असर नहीं: कंपनी ने कहा है कि इस टैक्स डिमांड का उसके परिचालन (Operations) या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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कैश रिजर्व: मारुति के पास पर्याप्त नगद भंडार (Cash Reserves) है, जिससे यह राशि कंपनी के लिए कोई बड़ा वित्तीय संकट पैदा नहीं करती।
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विवाद का इतिहास: बड़ी कंपनियों के लिए ऐसे टैक्स नोटिस सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, और कंपनी अक्सर इन्हें उच्च न्यायालयों या न्यायाधिकरणों में चुनौती देती है।
4. बाजार विशेषज्ञों का विश्लेषण
विशेषज्ञों के अनुसार, शेयर बाजार पर इसका असर अस्थायी रहने की संभावना है:
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बड़ी निवेश योजनाएं: कंपनी ने हाल ही में गुजरात में ₹35,000 करोड़ के नए प्लांट की घोषणा की है, जिससे लंबी अवधि में निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है।
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फंडामेंटल्स: कंपनी का वार्षिक उत्पादन 20 लाख यूनिट्स को पार कर गया है, जो इसके मजबूत फंडामेंटल्स को दर्शाता है।
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अपील प्रक्रिया: बाजार अब यह देखेगा कि न्यायाधिकरण कंपनी की दलीलों को स्वीकार करता है या नहीं। अगर फैसला कंपनी के पक्ष में आता है, तो शेयरों में फिर से रिकवरी देखी जा सकती है।
₹1183 करोड़ का नोटिस मारुति जैसी विशाल कंपनी के लिए एक “लीगल बाधा” तो है, लेकिन यह इसके कारोबार को प्रभावित करने वाला “घातक प्रहार” नहीं है। अल्पकालिक रूप से शेयर में अस्थिरता रह सकती है, लेकिन दीर्घकालिक निवेशकों के लिए कंपनी की विस्तार योजनाएं और बाजार हिस्सेदारी अधिक मायने रखती हैं।
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