ओटावा. भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक संबंधों में जमी बर्फ पिघलने के संकेतों के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के प्रस्तावित भारत दौरे से ठीक पहले, कनाडा सरकार ने 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य आरोपियों में से एक, तहव्वुर राणा की नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
धोखाधड़ी के आधार पर कार्रवाई
कनाडा के इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) ने स्पष्ट किया है कि राणा की नागरिकता केवल आतंकी आरोपों के कारण नहीं, बल्कि नागरिकता आवेदन में दी गई गलत जानकारी (Misrepresentation) के कारण रद्द की जा रही है।
जांच में निम्नलिखित चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
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झूठा निवास प्रमाण: राणा ने 2000 में दावा किया था कि वह पिछले 4 वर्षों से ओटावा और टोरंटो में रह रहा है।
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छिपाई गई विदेश यात्राएं: उसने केवल 6 दिन कनाडा से बाहर रहने की बात कही थी, जबकि वह उस दौरान अमेरिका के शिकागो में अपना कारोबार चला रहा था।
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नागरिकता प्राप्ति: 1997 में कनाडा पहुंचे राणा ने इसी फर्जीवाड़े के आधार पर 2001 में कनाडाई पासपोर्ट हासिल किया था।
भारत के लिए बड़ी जीत
64 वर्षीय राणा को अप्रैल 2025 में अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था, जहाँ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया। वह डेविड कोलमैन हेडली का करीबी सहयोगी रहा है और मुंबई हमलों की रसद और साजिश में उसकी भूमिका अहम मानी जाती है।
“यह कदम दर्शाता है कि कनाडा अब अपनी धरती का इस्तेमाल करने वाले तत्वों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रहा है, खासकर तब जब मामला आतंकवाद और कानूनी धोखाधड़ी से जुड़ा हो।” — राजनीतिक विश्लेषक
कानूनी पेंच: फेडरल कोर्ट तय करेगा भविष्य
कनाडा सरकार ने इस मामले को अंतिम फैसले के लिए फेडरल कोर्ट में भेज दिया है। हालांकि, राणा के वकीलों ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए अपील दायर की है। यदि कोर्ट नागरिकता रद्द करने के पक्ष में फैसला सुनाता है, तो राणा के पास से कनाडाई सुरक्षा का कानूनी कवच पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
मुख्य बिंदु एक नज़र में:
| विवरण | तथ्य |
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| आरोपी | तहव्वुर राणा (64 वर्ष) |
| मुख्य आरोप | 26/11 मुंबई हमले की साजिश |
| कार्रवाई का कारण | नागरिकता आवेदन में फर्जीवाड़ा |
| वर्तमान स्थिति | भारत में NIA की हिरासत में |
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